बीटी बैंगन पर सुझाव मांगा

भारत सरकार ने कहा है कि विवादास्पद बीटी बैंगन के व्यावसायिक उत्पादन को लेकर वह वैज्ञानिकों, किसानों, उपभोक्ता समूहों और स्वयंसेवी संगठनों से चर्चा करेगी. पर्यावरण मंत्रालय ने इस साल के अंत तक इस बारे में लोगों की राय भी मांगी है.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि वे जनवरी और फरवरी में इस विषय में लोगों से सलाह मशविरा करेंगे. उन्होंने कहा है, "अंतिम फ़ैसला सभी पक्षों की राय सुनने के बाद और यह सुनिश्चित करने के बाद ही लिया जाएगा कि भागीदार इस बात से संतुष्ट हैं कि उनकी बात सुन ली गई है."

इससे पहले बुधवार को बीटी बैंगन को व्यावसायिक रुप से उगाने की अनुमति देने के लिए बनी समिति ने इसे मंज़ूरी दे दी थी और सरकार से कहा था कि वह इस पर विचार करें.इसके बाद माना जा रहा है कि बीटी बैंगन के व्यवसायीकरण का रास्ता लगभग साफ़ है.

कमेटी ने माना है कि इस फ़सल को उगाने को लेकर जो आशंका प्रकट की जा रही थीं, वो सही नही हैं. बीटी बैगन पैदा करने को लेकर कई गैर सरकारी संगठन और किसान संगठन विरोध प्रकट करते रहे हैं. लेकिन इस कमेटी के अनुसार अनुवांशिक रुप से संवर्द्धित फ़सलों को लेकर जो भी अध्ययन और आंकड़े उपलब्ध हैं उनसे पता चलता है कि इनसे सेहत या पर्यावरण पर कोई बुरा प्रभाव नही पड़ता है.

बीटी बैंगन उगाने के प्रस्ताव का विरोध करने वाले संगठनों का कहना है की अनुवांशिक संवर्द्धित फ़सलों पर किये गए परिक्षण ये साबित कर चुके हैं की ये फ़सले सेहत और पर्यावरण दोनो के लिए सही नही हैं. अगर भारत में बीटी बैंगन को अनुमति दी जाती है तो यह देश में जेनेटिक रुप से परिष्कृत पहला खाद्य पदार्थ होगा.

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