बौद्ध पताकाओं के लिए पेड़ों की कटाई

बौद्ध पताकाओं के लिए पेड़ों की कटाई

भूटान की सरकार ने देशवासियों को पेड़ न काटने की चेतावनी दी है. हर साल बौद्ध प्रार्थना पताकाएं फहराने के लिए हज़ारों कच्चे पेड़ काटे जाते हैं.

सरकार का कहना है कि पेड़ों की कटाई न केवल भूटान के प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ख़तरा है बल्कि ‘सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता’ को प्रेरित करने के सरकार के दायित्व को भी चुनौती देती है.

ये बौद्ध पताकाएं इसलिए फहराई जाती हैं जिससे मृतकों को अपने अगले जीवन में सही मार्ग ढूंढने में सहायता मिल सके.

बौद्धों का विश्वास है कि दिवंगत व्यक्ति के लिए जितने अधिक खंभे गाढ़े जाएंगे उतना अच्छा होगा. बौद्ध भिक्षुओं का कहना है कि हर बार नए खंभे गाढ़े जाने चाहिए.

सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि जून 2007 से लेकर जून 2008 के बीच 60,178 पेड़ काटे गए. यूं समझिए कि 165 पेड़ प्रतिदिन काटे गए. इसके अलावा और ज़रूरतों के लिए 550 पेड़ प्रतिदिन की दर से काटे गए.

‘ जितने पेड़ उतना पुण्य ’

भूटान के वन विभाग के प्रवक्ता गोपाल महत ने अंग्रेज़ी अख़बार कुऐंसिल को बताया, “पेड़ों की कटाई से भूटान के जंगलों को बड़ा नुकसान हो रहा है. हम इस महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के लिए परमिट देना भी नहीं रोक सकते क्योंकि इससे भावनाएं जुड़ी होती हैं. यही नहीं इस अनुष्ठान के लिए कच्चे और सीधे पेड़ों की मांग होती है जो बड़े हो सकते हैं”.

बहुत से बौद्ध यह मानते हैं कि दिवंगत व्यक्ति के लिए प्रार्थना पताकाएं फहराने के लिए खंभों की आदर्श संख्या 108 है.

बौद्ध भिक्षु ग्येम त्शेरिंग का कहना है, “अगर आप पुराने खंभे का इस्तेमाल करें तो यह समझा जाता है कि आप अपने प्रियजन के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे. जिसका मतलब है कि आपको पुण्य भी कम मिलेगा. आदर्श रूप में आपको 108 पताकाएं फहरानी चाहिए लेकिन अगर आप इससे अधिक फहरा सकते हैं तो इससे मृतक को सही मार्ग ढूंढने में सहायता मिलेगी”.

भूटान के अधिकारियों का कहना है कि अगर इसी गति से पेड़ों की कटाई होती रही तो अगले 20 सालों में देश के अधिकांश जंगल ख़त्म हो जाएंगे.

यह समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि राजधानी थिंपू में वन अधिकारियों ने प्रार्थना पताकाओं के बल्लों की संख्या 29 तक सीमित कर दी है.

ऐसी योजना भी है कि लोगों को प्रार्थना पताकाओं के लिए पेड़ के खंभों के स्थान पर बांस का इस्तेमाल करने को प्रेरित किया जाए. लेकिन इससे पहले इस काम के लिए स्टील के खंभे इस्तेमाल करने की योजना विफल हो चुकी है.

भूटान का संविधान ‘सकल घरेलू उत्पाद’ से अधिक ‘सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता’ को महत्व देता है जिसके अनुसार देश का 60 प्रतिशत भाग वनक्षेत्र होना चाहिए.

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