जरदारी अपने अधिकारों को छोड़ने पर सहमत

समाचार एजेंसी ऑनलाइन के अनुसार जरदारी ने संवैधानिक सुधारों पर गठित एक संसदीय समिति को गुरुवार को इसकी सूचना दी है।

ऐसा वर्ष 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति परेवज मुशर्रफ द्वारा किए गए 17वें संविधान संशोधन को रद्द करके किया जाएगा, जिसके अनुसार प्रधानमंत्री की शक्तियों को राष्ट्रपति को हस्तांतरित कर दिया गया था।

इस कदम से पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सत्ताधारी गठबंधन में वापस लौटने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार जरदारी ने संवैधानिक सुधारों पर संसदीय समिति के अध्यक्ष राजा रब्बानी को बुलाकर उनसे स्वतंत्र रूप से कार्य करने को कहा और राष्ट्रपति को केवल वर्ष 1973 के संविधान में हासिल अधिकार देने को कहा।

राष्ट्रपति पाकिस्तान के महालेखा परीक्षक, प्रधान निर्वाचन आयुक्त और अन्य संवैधानिक पदों पर भी केवल प्रधानमंत्री की सलाह पर नियुक्ति करने पर सहमत हो गए।

सूत्रों के अनुसार जरदारी के कुछ नजदीकी लोगों और मंत्रियों ने उन्हें अपने अधिकार प्रधानमंत्री को सौंपने से मना किया है। इससे उनके कमजोर पड़ने का अंदेशा है।

जरदारी ने उनकी सलाह मानने से इंकार कर दिया और कहा कि शरीफ और अन्य सहयोगियों से किए गए अपने वादे को पूरा करने के लिए वह वर्ष 1973 के संविधान को स्थापित करना चाहते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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