'सफल नहीं था पोखरण परीक्षण-2'

Pokhran Test
नई दिल्ली। वर्ष 1998 में पोकरण में किए गए जिन परमाणु परीक्षणों की बदौलत दुनिया भर में अपनी परमाणु शक्ति का डंका पीटा था, असल में उसमें एक परीक्षण तो सफल हुआ ही नहीं था। जी हां इस बात का खुलासा एक वरिष्‍ठ वैज्ञानिक ने किया है।

फुस हो गया था हाईड्रोजन बम

डीआरडीओ के प्रति‍निधि के साथ रहे वरिष्‍ठ वैज्ञानिक के संथानम ने यह खुलासा करते हुए बताया कि पोकरण-2 के नाम से हुआ परमाणु परीक्षण असल में सफल हुआ ही नहीं था। उन्‍होंने दावा किया है कि इसमें उम्मीद से कम परिणाम प्राप्त हुए और यह पूर्ण धमाके की बजाय मात्र एक सुरसुराहट भर रहा। यानी भारत का अपना हाईड्रोजन बम सही मायने में परीक्षण के दौरान फुस हो गया था।

परीक्षण स्थल के निदेशक रहे संथानम के मुताबिक थर्मोन्यूक्लीयर टेस्ट के जो परिणाम आए उससे इसे परमाणु शब्दावली के अनुरूप परीक्षण सफल नहीं माना जा सकता। उन्‍होंने कहा कि परीक्षण की क्षमता 45 किलोटीन बताई गई, जबकि पश्चिम देशों के विशेषज्ञों ने इसे चुनौती देते हुए इसकी क्षमता महज 29 किलोटन ही आंकी है। पोकरण द्वितीय परमाणु परीक्षण में पूर्ण सफलता मान लेना गलत है।

सीटीबीटी पर हस्‍ताक्षर से बचे भारत

संथानम ने भारत सरकार को सलाह दी है कि वो तब तक सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करने से बचे जब तक परमाणु परीक्षण में पूर्ण सफलता न प्राप्‍त कर लें। उन्होंने देश के परमाणु कार्यक्रम संचालन में सुधार की आवश्‍यकता जाहिर की।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+