हाथों में गर्म सलाखें उठाकर दिया बेगुनाही का सबूत
मंदसौर, 5 फरवरी (आईएएनएस)। आधुनिक समाज चाहे प्रगति के जितने दावे करे मगर मध्यप्रदेश में अंधविश्वास की जड़ें अब भी गहरी हैं। इसका प्रमाण गुरुवार को मंदसौर के पिपलिया मंडी में देखने को मिला जहां पुलिस की मौजूदगी में हत्या के एक आरोपी ने समाज की पंचायत में आग से तपकर सुर्ख लाल हो चुकी सलाखों को हाथों में उठाकर अपनी बेगुनाही का सबूत दिया।
जानकारी के मुताबिक पिपलिया मंडी में जनवरी माह में घनश्याम नाम के एक व्यक्ति की हत्या हुई थी। इस मामले में पुलिस ने अन्य आरोपियों के साथ लाल सिंह को भी आरोपी बनाया। मृतक और आरोपी सिंह, दोनों का नाता बाबरी मोंगिया समाज से है। इस समाज में परंपरा है कि व्यक्ति अगर अपने को निर्दोष बताता है तो उसे पंचायत के सामने उसका प्रमाण देना होता है।
बाबरी मोंगिया समाज की परंपरा के मुताबिक गुरुवार को पिपलिया मंडी में पंचायत लगी। इसमें पहुंचे लाल सिंह को पहले स्नान कराया गया। उसके बाद लाल सिंह के हाथ में कुछ पत्ते और धागे का सूत बांधा गया। समाज की मान्यता के मुताबिक कथित आरोपी को गर्म सलाखें हाथ में लेकर चलना होता है अगर हाथ और सूत दोनों जल जाते हैं तो उसे समाज भी आरोपी मान लेती है और आरोप सिद्ध होने पर उसका समाज से बहिष्कार कर दिया जाता है। हाथ व सूत के न जलने पर समाज उसे बरी कर देता है।
परंपरा का निर्वाहन करते हुए लाल सिंह ने आग से लाल हो चुकी लोहे की सलाखों को हाथ में उठाया और पांच कदम चला भी। ऐसा करके उसने अपनी बेगुनाही का सबूत दिया। बाबरी मोंगिया समाज के गीतालाल भाटी कहते हैं कि समाज की इस परंपरा को सरकारी तौर पर मान्यता नहीं है मगर उनके यहां यह वर्षो से चली आ रही है।
जब यह पंचायत लगी थी और लाल सिंह गर्म सलाखें लेकर चल रहा था तब वहां पुलिस भी मौजूद थी। पिपलिया मंडी के थाना प्रभारी पवन सिंघल ने आईएएनएस को बताया है कि पुलिस बल आरोपी को गिरफ्तार करने गया था मगर वहां एक हजार से ज्यादा लोग थे इसलिए पुलिस ने अनहोनी की आशंका के चलते पंचायत को नहीं रोका, परंतु बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
हालांकि रतलाम के उप पुलिस महानिरीक्षक वरुण कपूर ने आईएएनएस को बताया, "हमें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है। लेकिन फिर भी हम मामले की तहकीकात करा रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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