मुज़फ़्फ़राबाद में चरमपंथियों की सार्वजनिक रैली

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में 12 चरमपंथी संगठनों की बैठक हुई जिसमें पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया गया कि उनमें से जिन संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है उसे हटाया जाए.
बैठक में चरमपंथी नेता सैयद सलाहुद्दीन ने कहा, "मैं यक़ीन के साथ कहता हूँ कि भारत के क़ब्ज़े वाले कश्मीर में सक्रिय कोई भी चरमपंथी संगठन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से मुंबई हमलों से नहीं जुड़ा है."
भारत ने अब तक इस बैठक पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
भारत आरोप लगाता रहा है कि मुंबई हमलों के पीछे लश्कर-ए-तैबा का हाथ है और माँग की है कि संगठन के कुछ नेताओं को भारत प्रत्यर्पित किया जाए. लश्कर इन आरोपों से इनकार कर रहा है.
सार्वजनिक बैठक
पिछले साल नवंबर में मुंबई में 10 लोगों ने हमला किया था जिसमें 170 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.
मुज़फ़्फ़राबाद में बीबीसी संवाददाता ज़ुल्फ़ीकार अली का कहना है कि इस बैठक को रोकने के लिए अधिकारियों ने कोई कोशिश नहीं की हालांकि इनमें से कुछ संगठनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक आयोजन स्थल पर केवल कुछ पुलिसकर्मी मौजूद थे.
जैशे-मोहम्मद, हरकत-उल-मुजाहिदीन और अल बद्र समेत कई चरमपंथी संगठनों ने बैठक में हिस्सा लिया.
इन 12 संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि वो लश्कर-ए-तैबा और जमात-उद-दावा से जुड़े करीब 150 संदिग्ध चरमपंथियों को रिहा करे. मुंबई हमलों के बाद इन लोगों को पकड़ा गया था.
कुछ संगठन इस प्रस्ताव पर भी सहमत हुए कि कश्मीर मसले का हल सशस्त्र अभियान से ही निकाला जा सकता है. साथ ही पाकिस्तान सरकार पर ये आरोप भी लगाया गया कि वो कश्मीर विवाद पर पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की 'कायराना नीतियों' को ही चला रही है.












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