बाघ संरक्षण पर मध्यप्रदेश सरकार से जवाब तलब
देश और दुनिया में बाघों की संख्या लगातार घटती जा रही है। वर्तमान में मध्य प्रदेश ही ऐसा राज्य बचा है जहां बाघ ज्यादा संख्या में हैं। इसी को ध्यान में रखकर वन्यजीव प्रेमी नवनीत माहेश्वरी ने 2006 में जबलपुर उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी।
दायर याचिका में कहा गया था कि बाघों की मौत की खबर आए दिन सुनने और पढने को मिलती है। साथ ही उनकी खाल तथा अन्य अंगों को बेचने के मामले भी सामने आते रहते हैं। मध्य प्रदेश में बाघों की घटती संख्या के बीच उन्हें बचाने की जिम्मेदारी सरकार की है, इसके बावजूद कोई सकारात्मक पहल नहीं हो रही है।
याचिकाकर्ता के वकील आदित्य सांघी ने आईएएनएस को बताया कि उच्च न्यायालय ने इस याचिका के आधार पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका में उठाए गए मुद्दों को 'प्रोजेक्ट टाइगर' ने भी काफी हद तक सही ठहराते हुए कहा था कि जल्दी ही इस दिशा में पहल की जरूरत है।
अपने जवाब के साथ में 'प्रोजेक्ट टाइगर' ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा 27 जुलाई 2007 को लिखे गए पत्र को भी प्रस्तुत किया है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में बाघों की स्थिति पर चिन्ता जताते हुए राज्य स्तरीय समिति बनाने, टाइगर रिजर्व क्षेत्र में विशेष विकास कार्य कराने, फंड की व्यवस्था करने सहित रिक्त पड़े पदों को भरने का जिक्र किया है।
अधिवक्ता सांघी के मुताबिक उच्च न्यायालय ने सरकार से जवाब मांगा है कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए परामर्श पर राज्य सरकार ने अब तक क्या किया है, उसे पूरा करने में कितना वक्त लगेगा और बाघों की प्रदेश में क्या स्थिति है। यह जवाब दो सप्ताह के भीतर राज्य सरकार को उच्च न्यायालय को देना है। इस मामले की अगली सुनवाई दो मार्च को होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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