'मौत का भय भी पीड़ितों की मदद के फैसले से डिगा नहीं पाया'
मैत्रेयी बरुआ
बेंगलुरु, 2 जनवरी(आईएएनएस)। पिछले साल बिहार में आई भीषण बाढ़ के दौरान पीड़ितों की मदद करते वक्त मौत के करीब पहुंचने का त्रासद अनुभव अभी भी बेंगलुरु के इन पांच युवकों के जेहन में बरकरार है, लेकिन यह हादसा उन्हें फिर से बिहार जाने से रोक नहीं पाया है।
बिहार में तेज धार में बह जाने से बाल-बाल बचे ये युवक एक बार फिर वहां जाने की तैयारी में हैं। इस घटना को भुलाकर पांच युवक कार्तिक सिंगराजू, अब्दुल मोबीन, नवीन आऱ शाह फैजल और सोनाली कुसुम बिहार के मुरलीगंज प्रखंड में तीसरे चरण के बाढ़ राहत कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रहे हैं। एम़ एस. रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अंतिम वर्ष के छात्र फैजल का कहना है, "हम ऐसे खतरों को भुलाकर पीड़ित व्यक्तियों तक पहुंचना चाहते हैं।"
पिछले साल की घटना का जिक्र करते हुए वे बताते हैं, "वह 28 अगस्त की रात थी। मुरलीगंज में 20 लोगों को बचाने के बाद हम सुरक्षित ठिकाने की ओर बढ़ रहे थे। अचानक नाव का संतुलन बिगड़ गया और नाव पलट गई। तब पानी की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटा थी। चूंकि हम सभी आपदा प्रबंधन में कुशल थे, इसलिए हमने ना सिर्फ अपनी जान बचाई, बल्कि नाव में सवार 20 लोगों को भी सुरक्षित बचा लिया।"
ये सभी जन सहयोग फाउंडेशन के सदस्य हैं। 10 हजार सदस्यों वाला यह संगठन सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है। ये युवक एक बार फिर उन बाढ़ पीड़ितों के बीच होंगे। इसके लिए उन्होंने राहत सामग्री जुटाई है। पूर्व राष्ट्रपति ए़ पी. जे.अब्दुल कलाम उन पांचों युवकों की सराहना कर चुके हैं। 14 जनवरी से वे मुरलीगंज के लोगों की मदद में फिर से जुट जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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