भारतीय राजनीतिक नेतृत्व जिम्मेदार: अमेरिकी अखबार
न्यूयार्क, 28 नवंबर: भारत में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ने देश में आतंकवाद की चुनौतियों से पुख्ता तरीके से निपटने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की और इसका खामियाजा उसे अगले चुनाव में भुगतना होगा। 'वाल स्ट्रीट जर्नल' अखबार ने अपने संपादकीय में यह लिखा है।
अखबार लिखता है, "इस हालात के लिए देश का राजनीतिक नेतृत्व जिम्मेदार है, क्योंकि आतंकवाद के प्रति उसकी नीति ढुलमुल और हद से ज्यादा नरम रही है। मुंबई में इतने व्यापक पैमाने पर आतंकवादी हमला सरकार की आतंकवाद से जुड़ी नीति के लचर होने का सबूत है।"
अखबार लिखता है कि भले ही प्रधानमंत्री डा़ मनमोहन सिंह ने 'हर अपराधी को सख्त से सख्त सजा दिए जाने' का प्रण दोहराया है, पर सच यह भी है कि इस दहशतगर्दी से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया गया। अखबार लिखता है कि इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि भारत का कोई भी वीआईपी ठिकाना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
जर्नल के स्तंभकार सदानंद धुमे ने लिखा है कि कांग्रेस नेतृत्व की आतंकवाद से जुड़ी सोच भी सही नहीं है। उन्होंने आतंकवाद निरोधक कानून को खत्म किए जाने की कांग्रेस सरकार की नीति को गलत करार दिया है। वह लिखते हैं, "कांग्रेस सरकार ने न सिर्फ पोटा को खत्म कर दिया, बल्कि गुजरात सरकार को आतंकवाद के खिलाफ सख्त कानून तैयार करने की भी छूट नहीं दी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
मुंबई में आतंकी हमलेः हर पल की खबर












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