चंबल के पानी ने सिखाई प्रज्ञा सिंह को बगावत

ग्वालियर, 23 नवंबर (आईएएनएस)। मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का नाम आने के बाद हर शख्स उसके बागी तेवरों का राज जानना चाहता है। कहा जा सकता है कि चम्बल के पानी की तासीर ही बगावती है और इसका असर प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर भी साफ नजर आता है।

ग्वालियर, 23 नवंबर (आईएएनएस)। मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का नाम आने के बाद हर शख्स उसके बागी तेवरों का राज जानना चाहता है। कहा जा सकता है कि चम्बल के पानी की तासीर ही बगावती है और इसका असर प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर भी साफ नजर आता है।

प्रज्ञा का जन्म चम्बल के निपट बीहड़ इलाके में स्थित मध्यप्रदेश के भिन्ड जिले के लहार गांव में हुआ था लेकिन उसके जीवन पर छाप छोड़ी जालौन के परवर गांव ने, जो उसका पैतृक गांव है और जहां के लोगों का स्वभाव ही बगावती है। ये इलाका पहले बागी जगजीवन परिहार, निर्भय सिंह, पहलवान सिंह गुर्जर जैसों के नाम से सरकारी रिकार्ड में दर्ज था लेकिन अब लोग इसे सिर्फ प्रज्ञा के नाम से जानते हैं।

डकैत अक्सर अपराध के बाद यहां छुपने के लिए आते थे। इस गांव के हर घर में बंदूक देखी जा सकती है। यहां के 50 घरों में से 20 तो प्रज्ञा के रिश्तेदारों के है।

प्रज्ञा के चचेरे भाई करणवीर सिंह का मानना है कि उनकी बहन की रगों में एक ठाकुर का खून है जो कभी अन्याय सहन नहीं कर सकता। करण का बचपन भी प्रज्ञा के साथ ही बीता है। वे कहते हैं कि प्रज्ञा बचपन से ही तेज और तीखे स्वभाव की थी, उसने कई बार तो लड़कों की पिटाई तक की थी। प्रज्ञा ने दूसरों को सबक सिखाने के लिए जूडो कराटे तक में महारत हासिल की थी।

इसी गांव में रहने वाली प्रज्ञा की चचेरी बहन नीलम भदौरिया अपनी बहन को दोषी मानने को तैयार नहीं है। वे कहती हैं कि प्रज्ञा ऐसा काम कर ही नहीं सकती। हमारे परिवार में कभी किसी के खिलाफ पुलिस केस तक दर्ज नहीं हुआ।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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