प्रधानमंत्री का 100 दिनों के भीतर आतंकवाद निरोधक कार्यबल बनाने का सुझाव (राउंडअप)
नई दिल्ली, 23 नवंबर (आईएएनएस)। देश में बढ़ते बम विस्फोटों की घटनाओं के मद्देनजर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 100 दिनों के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन के नेतृत्व में एक कार्यबल बनाने का सुझाव दिया है जो नक्सलवाद, आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने में कारगर साबित होगा। साथ ही प्रधानमंत्री ने पुलिस बल को पूर्वाग्रह से ग्रसित कदम उठाने से बचने की सलाह दी।
प्रधानमंत्री यहां विज्ञान भवन में पुलिस महानिदेशकों(डीजीपी) व पुलिस महानिरीक्षकों(आईजीपी) के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री ने कहा, "आज हमें एक सघन सुरक्षा ढांचे की जरूरत है। आज के माहौल में खतरों का अक्सर पूर्वानुमान नहीं हो पाता। खतरे नकाब ओढ़े हुए हैं। इस स्थिति ने कानून-व्यवस्था के रखवालों का काम पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना दिया है।''
प्रधानमंत्री के अनुसार यह कार्यबल नक्सलवाद, आतंकवाद व उग्रवाद जैसे क्षेत्रों में उभर रही चुनौतियों का सामना करने के लिए एक एकीकृत क्षमता विकसित करेगा।
इसके अलावा यह कार्यबल सघन खुफिया सहयोग तथा मानवीय व तकनीकी खुफिया तंत्र में सुधार के जरिए घटनाओं का पूर्वानुमान करने व उसे रोकने की क्षमता बढ़ाएगा।
प्रधानमंत्री चाहते हैं कि यह प्रस्तावित कार्यबल सामाजिक व राजनीतिक घटनाओं के संदर्भ में रणनीतिक पूर्वदृष्टि विकसित करने के अतिरिक्त एक नेट केंद्रित सूचना कमांड ढांचा भी विकसित करे, जो समय रहते राज्य व केंद्रीय एजेंसियों को सुरक्षित तरीके से सूचना हासिल करने व सूचनाओं तक अपनी पहुंच बनाने में सक्षम बना सके।
मनमोहन सिंह ने कहा, "तत्काल उठाए जाने वाले कदमों के संदर्भ में 100 दिनों के भीतर कार्यबल का एक खाका सामने आ जाना चाहिए, साथ ही अगले कुछ महीनों के दौरान उठाए जाने वाले कदम भी तय हो जाने चाहिए, ताकि इस एकीकृत नव केंद्रित क्षमता को अमली जामा पहनाया जा सके।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल में जिस तरह के आतंकवादी हमले हुए हैं, उस तरह के और हमले अब देश नहीं सह सकता। इस तरह के खतरों से निपटने के लिए खुफिया तंत्र व पुलिस में सुधार जरूरी है।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं यहां सिर्फ यह कहना चाहूंगा कि समय हमारे पक्ष में नहीं है। हाल में दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरू, मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, गुवाहाटी व कुछ अन्य शहरों में जिस तरह के आतंकवादी हमले हुए हैं, उस तरह के और हमले अब हम नहीं झेल सकते।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "जब भी आतंकवादी हमले हुए, जनता ने पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों की आलोचना की और सरकार की विफलता के लिए होहल्ला मचाया।''
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "मुझे पता है कि पुलिस व खुफिया एजेंसियों की सतर्कता के कारण कई सारे आतंकी हमलों को नाकाम किया गया है। लेकिन औसत तीव्रता वाली एक अकेली घटना भी तमाम प्रतिक्रियाओं को जन्म देती है और सरकार तथा इसकी विभिन्न एजेंसियों पर सवालिया निशान खड़ा करती है।''
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक छह महीनों से भी कम समय में देश में 64 बम विस्फोट हुए। इन विस्फोटों में 215 से भी अधिक लोग मारे गए और 900 घायल हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मौजूदा संकट वैश्वीकृत विश्व की एक देन है। सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्वीकरण ने नए खतरे पैदा किए हैं।''
प्रधानमंत्री के अनुसार वैश्वीकरण ने आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के बीच की दूरी को और भी धुंधला बना दिया है।
उन्होंने पुलिस प्रमुखों से आह्वान किया कि आतंकवाद से निपटने के लिए वे भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करें। मनमोहन सिंह ने कहा कि आतंक के वैश्वीकरण ने आतंकवाद को और भी खतरनाक बना दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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