निर्वासित तिब्बतियों के बीच स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर हुई खुलकर बहस

धर्मशाला, 23 नवंबर (आईएएनएस)। तिब्बत के सैकड़ों निर्वासित नेताओं ने यहां पूर्ण स्वतंत्रता और स्वायत्तता को लेकर जबरदस्त बहस की। इस मुद्दे पर वे दो भागों में बंटे हुए भी दिखाई दिए लेकिन इस सबके बावजूद बैठक में लोकतंत्र का अनूठा नमूना देखने को मिला।

धर्मशाला, 23 नवंबर (आईएएनएस)। तिब्बत के सैकड़ों निर्वासित नेताओं ने यहां पूर्ण स्वतंत्रता और स्वायत्तता को लेकर जबरदस्त बहस की। इस मुद्दे पर वे दो भागों में बंटे हुए भी दिखाई दिए लेकिन इस सबके बावजूद बैठक में लोकतंत्र का अनूठा नमूना देखने को मिला।

आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा के निर्देश पर तिब्बत की निर्वासित संसद द्वारा 17 से 22 नवंबर तक बुलाई गई विशेष बैठक में लगभग 600 तिब्बती नेताओं ने इस विषय पर खुलकर चर्चा की।

इन नेताओं ने पूर्ण स्वतंत्रता से लेकर दलाई लामा की मध्यमार्गी नीति तक सभी विकल्पों पर चर्चा की। नेताओं ने वर्ष 2002 से दलाई लामा के दूत और चीन के बीच चल रही बातचीत के खिलाफ भी आवाज उठाई। बैठक में किसी को भी अपनी बात कहने से नहीं रोका गया।

तिब्बती यूथ कांग्रेस (टीवाईसी) के अध्यक्ष त्सेवांग रिजिन ने आईएएनएस से कहा, "बैठक के दौरान मुझे अपनी बात कहने दी गई। यही स्वस्थ लोकतंत्र का लक्षण है। मैंने पूर्ण स्वतंत्रता की बात कही लेकिन किसी ने भी मेरी मुखालफत नहीं की।"

उधर दलाई लामा की मध्यमार्गी नीति के समर्थक डावा त्सेरिंग ने कहा, "कुछ समूहों के बीच गर्मागर्म बहस हुई लेकिन कुल मिलाकर विचारों का यह आदान प्रदान बेहतर रहा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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