संसद सत्र छोटा होने पर लोकसभा में चिन्ता
नयी दिल्ली .30 नवम्बर. वार्त. लोकसभा में आज अनेक सदस्यों नेसंसद सत्र की अवधि कम होते जाने पर चिन्ता व्यक्त की कि इससेजनहित के अनेक मुद्दों पर चर्चा और उनका समाधान नहीं हो पाता1 संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशीने कहा कि सरकार यह प्रयास कर रही है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करायी जाये और संसद की बैठकें वर्ष में कम से कम 100 दिन अवश्य हों1 भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के गुरुदास दासगुप्त ने यह मामला शून्यकाल में उठाते हुये कहा कि सरकार को सत्र बुलाने से असुविधा होतीहै इसीलिये अब संसद सत्र छोटे होते जा रहे हैं1 पहले वर्ष में 120 दिनसत्र चलता था पर अब 65 से 80 दिन ही चलता है1 उन्होंने कहा किपिछले 9 वषो में चालू सत्र सबसे छोटा 17 दिन का है जिसमें कामकाज ग्यारह दिन ही चला पायेगा1 इस कारण किसानों की आत्महत्याजैसे महत्वपूर्ण मसलों पर चर्चा होना मुशिकल है1 उन्होंने मांग की किसंसद सत्र वर्ष में कम से कम 100 दिन अवश्य चलना चाहिये तभीइसकी प्रासंगिकता रहेगी और प्रजातंत्र चल पायेगा1 रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने हस्तक्षेप करते हुये कहा कि प्रश्नकाल के बाद कितने सदस्य सदन में रहते हैं इस पर भी विचार करने की जरुरत है1 श्री दासमुंशी ने कहा कि यह कहना गलत है कि संसद अप्रसांगिकहो गयी है1 उन्होंने कहा कि यह भी कहना गलत है कि यह सत्र सबसेछोटा है क्योंकि पहले 16 दिन और पांच दिन के भी सत्र हुये हैं1 उन्होंने कहा कि कई बार देखा गया है कि देर शाम सदन में दस . बारह सदस्य ही रह जाते हैं1 उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले तीन वषो में इस मुद्दे पर कई सम्मेलन भी बुलाये हैं और जनहित के मामलों कासमाधान निकाला जाये इसके लिये संसद सत्र वर्ष में कम से कम 100 दिन चले ये प्रयास किये जा रहे हैं1 लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि अच्छा है कि सदस्यइस मामले को लेकर चिंतित हैं1 उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इस मुद्दे पर नेताओं की पृथक बैठक बुलायेंगे1 निगम.संजीव.राणा 1355वार्ता












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