सरकार स्पष्ट करे क्या हाथी सवारी न्यायोचित है.अदालत
जयपुर 17 अक्टूबर .वार्ता. राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार कोशपथपत्र पर यह स्पष्ट करने को कहा है कि पिछले दस सालों में हाथियोंके उपयोग से कितनी दुर्घटनाएं हुई . और क्या वन्यजीव संरक्षण एवंपशु क्रूरता निवारण अधिनियम के अस्तित्व में आने के बाद हाथी कीसवारी न्यायोचित है
न्यायमूर्ति आर एम लोढा एवं न्यायमूर्ति महेश चंद शर्मा कीखंडपीठ ने यह आदेश प्रार्थी नरेश कुमार काद्रियान की जनहित याचिकाकी सुनवाई के बाद दिया
याचिका में न्यायालय को बताया गया कि वन्य जीव संरक्षणअधिनियम 1972 एवं पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के अस्तित्वमें आने के बाद भी प्राचीन काल से चली आ रही हाथी की सवारी उचितहै1 याचिका में कहा गया कि हाथियों को आमेर में पर्यटकों की सवारी केअलावा शादी. फिल्म शूटिंग एवं पोलोमैच में भी उपयोग में लिया जाता है1साथ ही यह भी बताया गया कि हाथी को अगर तीस डिग्री या उससेअधिक तापमान पर रखा जाता है तो उसे कई तरीके की बीमारी होसकती है जिनमें अन्धापन प्रमुख है1 इसके अलावा महावतों द्वारा लोहेके अंकुश काम में लिए जाते है1 याचिका में मुख्य तौर पर इस बिन्दु कोउठाया गया है कि जयपुर एवं आमेर में हाथियों की सही संख्या घोषति नहीं की गई है और उनके मालिकों ने अधिकाधिक प्रमाण पत्र भी नहीं दिए हैं
राज्य सरकार ने अपने जवाब में जयपुर एवं आमेर में कुल 119 हाथी बताए हैं इनमें से 105 के मालिकों ने प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर रखा है जबकि 14 हाथी अनाधिकृत बताए हैं1 सरकार ने अब तक 105 में से 92 हाथी मालिकों को प्रमाणपत्र दे रखे हैं1 जिन 14 हाथियों के मालिकों ने प्रमाणपत्र के लिए आवेदन नहीं किया है उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी1 सरकार ने यह भी कहा कि हाथियों पर पर्यटकोंकी सवारी प्राचीनकाल से चली आ रही है यह एक परम्परा बन गईहै1 सरकार ने स्पष्ट किया कि महावतों द्वारा विशेष अवसरों के अलावा लकडी के अंकुश काम में लिए जाते हैं1 लेकिन न्यायालय ने माना कि सरकार ने पशुओं के संरक्षण एवं कू्ररता को लेकर बने कानूनों कीपालना नहीं की है. इसलिए अतिरिक्त महाधिवक्ता से इस संबंध मेंशपथपत्र पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है1 मामले की अगली सुनवाई15 नवबंर को होगी
सं.आशा नंद085
वार्ता









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