लोकरूचि रामलीलाउत्तराखंड
अनूठी है पर्वतीय अंचल की रामलीला नैनीताल 13 अक्टूबर.वार्ता.देश में मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान् श्री रामकी जीवन लीलाओं को रामलीला के रूप में रंगमंच पर मंचित करने कीपरंपरा सदियों से निर्बाध रूप से चली आ रही है 1 उत्तराखंड के कुमायूंपर्वतीय क्षेत्रों में होने वाली रामलीला देश के अन्य क्षेत्रों में होने वालीरामलीला से हटकर अपने में अनूठी है 1 स्थानीय रामलीला ज्ञाताओं के अनुसार कुमायूं मंडल मेंरामलीला का इतिहास लगभग डेढ़ सौ साल पुराना है 1 यहां सबसे पहले1860 में अल्मोड़ा में रामलीला मंचन की शुरूआत् हुयी थी इससे पहलेयहां ब्रज की मंडलियों द्वारा नौटंकी और रास के जरिये कृष्ण तथा रामकी लीलाओं का मंचन किया जाता था 1 यही वजह है कि यहां कीरामलीला में ब्रज का श्रंृगार तथा वेशभूषा और लोक संस्कृति की लकसाफ दिखायी पड़ती है 1 कुमायूं की रामलीला का मुख्य अंग संगीत है और इसकी संवादतथा शैली गेय पद्धति पर आधारित है 1 इसमें गोस्वामी तुलसीदास द्वारारचित दोहे ् चौपाई ् छंद और सोरठों के साथ राधेश्याम जी कीरामायण से भी सामग्री ली गयी है 1 इसके अलावा वेताब ् तालिबआादि की शेरोशायरी का भी बखूबी प्रयोग किया जाता है 1 विभिन्नरागरागनियों में निबद्ध रामलीला के गीतों की एक अलग विशेषता है
रामलीला में इन गीतों को गाने वाले ज्यादातर पात्र रागों की शास्त्रीयताऔर उतारचढ़ाव से अनजान होने के बावजूद इन गीतों के भाव औरप्रस्तुतीकरण से तात्कालिक घटनाक्रम को जीवंत बनाने की सामथ्र्यरखते हैं 1 संवाद.जितेन्द्र प्रकाश0853जारी.वार्ता.












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