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Success Story: मिड डे मील वर्कर का बेटा बना अफसर, हरदीप गिल ने खुद भी खेतों में किया काम

Motivational Story of Hardeep gill CDS: हरियाणा के जींद जिले में उचाना के पास एक छोटा सा गांव अलीपुरा है। यहां के हरदीप गिल ने बुलंद हौसलों के दम पर कामयाबी की बड़ी उड़ान भरी है। गिल की सक्‍सेस स्‍टोरी उन युवाओं के लिए प्रेरणादायी है, जो घर की कमजोर आर्थिक स्थिति को कोसते रहते हैं और कामयाबी हासिल करने के लिए मेहनत करना ही छोड़ देते हैं।

हरदीप गिल ने बचपन में ही पिता को खो दिया। तब इनकी उम्र में डेढ़ साल थी। हरदीप गिल के पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। मां अनपढ़ है। हरदीप के 3 बहन हैं। पति की मौत के बाद चारों बच्‍चों की प‍रवरिश व पढ़ाने की जिम्‍मेदारी मां ने अपने कंधों पर ली। सरकारी स्‍कूल में मिड डे मील वर्कर के रूप में काम करके बच्‍चों को पाला।

Hardeep gill NDA Navy Officer

हरदीप गिल की सक्‍सेस स्‍टोरी रिटायर्ड मेजर जनरल यश मोर ने अपने यूट्यूब चैनल Maj Gen Yash Mor पर शेयर की है। मोर से बातचीत में हरदीप गिल ने अपने परिवार के संघर्ष, खुद की मेहनत व कामयाबी की पूरी कहानी बताई है। हरदीप ने बताया कि चौथी कक्षा तक की पढ़ाई उसी सरकारी स्‍कूल से की, जिसमें मां मिड डे मील योजना के तहत भोजन बनाने का काम करती थी।

उसी स्‍कूल के एक टीचर ने हरदीप की प्रतिभा को पहचान लिया था और उसकी मां को सलाह दी कि बेटे की पढ़ाई कभी मत छुड़वाना और किसी अच्‍छे स्‍कूल में दाखिला करवाना। फिर पड़ोस के गांव लोदर के एक निजी स्‍कूल में प्रवेश लिया। दसवीं कक्षा में 86 प्रतिशत अंक हासिल किए और सीडीएस में 54वीं रैंक हासिल की।

NDA Navy Officer

हरदीप ने बताया कि उनके परिवार के पास 2 हैक्‍टेयर जमीन है, जिस पर मां व तीन बहनों के साथ हरदीप ने खूब मेहनत की। साथ पशुपालन के जरिए भी घर व पढ़ाई का खर्च निकाला। हरदीप सुबह पांच बजे जग जाया करते थे और सुबह-सुबह पशुओं की देखभाल करते। फिर दिनभर खेतों में काम करते। तीसरे प्रयास में सीडीएस एग्‍जाम पास कर लिया।

इधर, राजस्‍थान के झुंझुनूं जिले की खेतड़ी तहसील के गांव बाडलवास निवासी शुभम नरवाल की सक्‍सेस स्‍टोरी भी हरदीप गिल से मिलती-जुलती है। शुभम के पिता की भी मौत हो गई थी। फिर मां ने मनरेगा में मजदूरी करके बेटे को पढ़ाया और नेवी अफसर बना दिया। शुभम ने बिना कोचिंग सफलता हासिल की है।

यह भी पढ़ें- Success Story: पिता की मौत के बाद मां ने नरेगा में मजदूरी करके बेटे को बनाया नेवी अफसर

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