कोटा की बेटी सुष्मिता चौधरी बनीं ISRO साइंटिस्ट, Chandrayaan-3 मिशन में निभाई खास भूमिका

चंद्रयान-3 मिशन की टीम का हिस्‍सा इसरो वैज्ञानिक सुष्मिता चौधरी मूल रूप से राजस्‍थान कोटा जिले के सांगोद के पास के गांव की रहने वाली है। वर्तमान परिवार कोटा के श्रीनाथपुरम में रहता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी (ISRO) चांद पर तिरंगे की मौजूदगी के लिए आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 14 जुलाई 2023 को अपना चंद्रयान-3 मिशन लॉंच कर किया।

Chandrayaan-3

चंद्रयान-3 में देशभर के वैज्ञानिकों का अहम योगदान रहा। इनमें राजस्‍थान के कोटा की बेटी सुष्मिता चौधरी भी शामिल रहीं। इसरो वैज्ञानिक सुष्मिता चौधरी ने चंद्रयान-3 लॉन्च व्हीकल की ट्रेजेक्टरी की डिजाइन करने वाली टीम में अहम भूमिका निभाई है।

मीडिया से बातचीत में सुष्‍मता चौधरी ने बताया कि उनके पिता रेलवे में इंजीनियर हैं। पहले परिवार चित्‍तौड़गढ़ में रहता था। बाद परिवार कोटा श्रीनाथपुरम में रहने लगा।

कोटा से ही सातवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई की। कोटा में ही आईआईटी की तैयारी की। आईआईटी मंडी हिमाचल में इलेक्ट्रिकल ब्रांच में इंजीनियरिंग की। साल 2018 में आईआईटी कंप्लीट होने के साथ ही कॉलेज कैंपस प्‍लेसमेंट में इसरो में सिलेक्शन हुआ।

सुष्मिता चौधरी ने साइंटिस्‍ट सी लेवल पर इसरो ज्‍वाइन किया। चार साल बाद प्रमोशन पाकर एसडी लेवल 11 की वैज्ञानिक बन गईं। पिता वर्तमान में मुंबई चर्चगेट में तैनात हैं। कोटा में मां और तीन बहनें रहती हैं।

ऐसे में मिला इसरो में मौका
सुष्मिता ने बताया कि आईआईटी पूरी की तब वह इकलौती लड़की थी, जिसका चयन इसरो में हुआ था। कई चरणों का इंटरव्‍यू पूरा किया तब जाकर इसरो ज्‍वाइन कर सकी। पहले चार साल की अकेडमिक रिपोर्ट देखी। प्रोजेक्टस देखे, जिन पर स्टूडेंटस ने काम किया। इसके बाद इंटरव्यू। वो भी पूरे 40 मिनट का।

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