kamla Meghwal Success Story: 11 साल की उम्र में करंट लगने से दोनों हाथ गंवाने वाली कमला बन गई टीचर
kamla Meghwal REET Churu: कमला मेघवाल राजस्थान के चूरू जिले के सरदारशहर उपखंड के गांव अमरसर की रहने वाली है। रीट 2023 उत्तीर्ण करके शिक्षिका बनी है।
Kamla Meghwal Motivational Story: दोनों हाथ नहीं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर। इसके बावजूद कमला मेघवाल ने सरकारी नौकरी पाने में सफलता हासिल की है। वजह है बुलंद हौसले और कड़ी मेहनत। कमला मेघवाल की सक्सेस स्टोरी हर किसी को प्रेरित करने वाली है।

राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (2023) पास करके शिक्षिका बनने वाली कमला मेघवाल राजस्थान के चूरू जिले के सरदारशहर उपखंड के गांव अमरसर की रहने वाली है। साल 2021 की असफलता भी कमला मेघवाल की हिम्मत नहीं तोड़ पाई।
बता दें कि 14 अप्रैल 2009 को स्कूल से घर जाते समय नीचे झूलते 11 हजार केवी बिजली के तारों की चपेट में आने से कमला के दोनों हाथ बुरी तरह से झुलस गए थे। अस्पताल में इलाज के दौरान कमल के दोनों हाथ कोहनी तक काटना पड़े। तब कमला की हिम्मत जवाब दे गई थी।
कमला जीवन में हार मान चुकी थी, मगर एक दिन टीवी पर यूपी के एक युवक को बिना अंगुलियों व हथेलियों के भी कागज पर कुछ लिखते देखा। उसने पेंसिल कोहनी के सहारे से पकड़ रखी थी। तब कमला ने बिना हथेलियों के कोहना पर रस्सी से पैन बांधकर लिखने का प्रयास शुरू किया तो धीरे-धीरे हौसला बढ़ा।
फिर कमला ने स्वयपाठी विद्यार्थी के रूप में 60 फीसदी अंकों के साथ दसवीं पास की। गांव गोगासर में दादा-दादी के साथ रहकर कक्षा 11वीं और 12वीं भी उत्तीर्ण की। फिर बीकानेर से बीएसटीसी की पढ़ाई की। वर्तमान में सरदारशहर के निजी कॉलेज से बीए करने के बाद एमए की पढ़ाई कर रही है।
मीडिया से बातचीत में कमला मेघवाल ने बताया कि साल 2021 में भी उसने रीट दिया था, मगर पास नहीं हुई। तब भी हिम्मत नहीं हारी और साल 2023 में फिर परीक्षा दी। इस बार सफलता मिली। सीकर में रहकर रीट की तैयारी की थी। कमला पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी है। पिता भभूताराम मेघवाल खेती करते हैं। मां भंवरीदेवी हाउसवाइफ है।












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