Ashish Puniya: 23 साल के आशीष पूनिया बने IPS, पहली तनख्वाह गरीब बच्चों को डॉक्टर बनाने में की दान
IPS Officer Ashish Puniya Success Story: 'भरत जी सर मैंने अगस्त में ही भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) ज्वाइन की है। हम सब लोग पहली तनख्वाह को पुण्य के काम में लगाते हैं। मैं इससे बेहतर कोई अवसर नहीं मानता। कृपया इसे स्वीकार करें और हमारे आत्मविश्वास का कारण बने रहें...।'
वाट्सएप पर यह मैसेज भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अफसर आशीष पूनिया का है, जो राजस्थान के बाड़मेर में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को दानदाताओं के सहयोग से जीव विज्ञान विषय की निःशुल्क शिक्षा देकर डॉक्टर बनाने वाली संस्था Fifty Villagers के संचालक हैं।

Ashish Puniya AIR 557 UPSC 2022
आशीष पूनिया ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2022 में अखिल भारतीय स्तर पर 557वीं रैंक हासिल करके आईपीएस अफसर बने हैं। आईपीएस के रूप में ज्वाइन करने के बाद अगस्त माह 2023 की पहली तनख्वाह के 51,251 रुपए 50 विलेजर्स संस्थान को दान किए हैं, ताकि गरीब परिवारों के बच्चे डॉक्टर बने सकें।
कौन हैं आईपीएस अफसर आशीष पूनिया?
- महज 23 साल की उम्र में आईपीएस बने आशीष पूनिया भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित राजस्थान के बाड़मेर जिले के गांव डाबली नाडी के रहने वाले हैं।
- आशीष पूनिया के पिता जोगाराम पूनिया राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय पाबूजी की ओरण, पायला कला में शिक्षक हैं।
- आशीष पूनिया ने शुरुआती शिक्षा गांव डाबली नाड़ी के सकूल से पाई। फिर कुचामन नागौर से 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई की। दो बार आईआईटी में फेल हुए।

- आशीष पूनिया को एनआईटी रायपुर में बायाटेक ब्रांच मिली। इन्होंने वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय राजस्थान का खुला विश्वविद्यालय कोटा से बीएससी की।
- पढ़ाई पूरी करने के बाद आशीष पूनिया ने लैब असिस्टेंट की परीक्षा पास की और जोधपुर के लूणी में एक विद्यालय में लैब टेक्नीशियन पद पर ज्वाइइन किया।
- लैब असिस्टेंट की नौकरी के साथ ही यूपीएससी की तैयारी की। तीन साल दिल्ली से ऑनलाइन से कोचिंग ली। दो बार साक्षात्कार तक पहुंचे। तीसरे प्रयास में आईपीएस बन गए।
IFS प्रवीण कस्वां ने भी दान की थी पहली तनख्वाह
बाड़मेर जिले से आईपीएस बने आशीष पूनिया की तरह फेमस आईएफएस अफसर प्रवीण कस्वां ने भी अपनी पहली तनख्वाह दान की थी।
आशीष पूनिया की पहली तनख्वाह दान किए जाने की एक पोस्ट ट्विटर पर वायरल हो रही है, जिस पर कमेंट करते हुए आईएफएस प्रवीण कस्वां ने लिखा कि 'इस ट्वीट ने मुझे भी कुछ याद दिला दिया। बहुत साल पहले मैंने भी अपनी पहली तनख़्वाह गांव के काम के लिए दान की थी। गांव ने इक्कट्ठे होकर चेक स्वीकार किया और गौशाला में उन पैसों को इस्तेमाल किया। एक सुखद अनुभूति। उस समय की तस्वीर मोबाइल में रहती है'।
बता दें कि इंडियन फॉरेस्ट सर्विस यानी भारतीय वन सेवा के अफसर परवीन कस्वां राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित मिर्जावाली मेर गांव के रहने वाले हैं। पूरी कहानी यहां नीचे क्लिक करके पढ़ें।












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