धनराज लववंश : वो लड़का जो 3 सरकारी नौकरी छोड़ बेचने लगा दूध, अब हर महीने कमा रहा डेढ़ लाख रुपए
Dhanraj Lavvansh Rajasthan: भैंस का दूध बेचकर हर माह डेढ़ लाख रुपए कमाने वाला धनराज लववंश राजस्थान के बारां जिले के छीपा बड़ौद के गांव आसलपुर का रहने वाला है।

एक बार सरकारी नौकरी लगने पर अक्सर लोग उसी में जिंदगी खपा देते हैं। सरकारी नौकरी छोड़कर किसी मनपसंद क्षेत्र में कॅरियर बनाने की हिम्मत हर कोई नहीं जुटा पाता, मगर इस मामले में धनराज लववंश की कहानी सबसे जुदा है। राजस्थान में धनराज लववंशी वो शख्स है, जो एक नहीं बल्कि तीन बार सरकारी नौकरी ठुकरा चुका है।
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धनराज ने सरकारी नौकरी छोड़ने के फैसले में ज्यादा दिमाग नहीं लगाया बस अपने दिल की सुनी। यही वजह है कि जितने पैसे नौकरी में रहते कमाता उससे ज्यादा तो आज कमा रहा है। दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहा सो अलग।

धनराज लववंशी का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में 29 वर्षीय धनराज लववंशी ने अपनी सक्सेस स्टोरी शेयर करते हुए बताया कि बीते चार साल से वे बारां जिले से लगते झालावाड़ जिले के अकलेरा में डेयरी का संचालन कर रहे हैं। वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) का उत्पादन भी कर रहे हैं और इसी साल अप्रेल तक नर्सरी भी खोल लेंगे। साथ ही छीपा बड़ौद में इनका फार्म हाउस भी है, जहां पर ये सब्जियां उगाते हैं।

हर साल 18 लाख रुपए की कमाई
धनराज कहते हैं कि डेयरी, वर्मी कम्पोस्ट व फार्मिंग से वे हर माह सारा खर्च निकालकर करीब डेढ़ लाख रुपए बचा रहे हैं। सालाना इनकम 18 लाख तक पहुंच रही है। आय का बड़ा जरिया भैंस का दूध है। इनके पास हरियाणा की मुर्रा नस्ल की 23 भैंस हैं। अपने ब्रांच मैनेजर, फिल्ड ऑफिसर व डिलीवरी बॉय की मदद से दूध अकलेरा में घर घर पहुंचा रहे हैं।

दूध के लिए छह माह पहले बुकिंग
धनराज की डेयरी से रोजाना भैंस का 150 लीटर दूध बेचा जा रहा है, जो 70 रुपए प्रति किलोग्राम है। डेयरी में दूध पैकेट में भरकर तैयार किया जाता है। आलम यह है कि धनराज की डेयरी से दूध लेने के लिए लोगों को छह माह पूर्व एडवांस में बुकिंग करवानी पड़ती है। धनराज की भैंसों की कीमत 57 हजार रुपए से दो लाख रुपए तक है।

धनराज लववंशी की सरकारी नौकरी
धनराज ने 12 तक पढ़ाई करने के बाद बीएसटीसी का कोर्स भी किया। साल 2018 में अकेलेरा एसीजेएम कोर्ट में लिपिक ग्रेड द्वितीय पर पहली बार सरकारी नौकरी लगी। 14 हजार 600 रुपए में सालभर तक नौकरी की। प्रोबेशन पीरियड में ही छोड़ दी। फिर तहसील में एलडीसी लगा। यहां ज्वाइन नहीं किया। तीसरी नौकरी साल 2019 में थर्ड ग्रेड टीचर के रूप में लगी। साल 2022 में 37 हजार रुपए महीना की शिक्षक की नौकरी भी छोड़ दी।

हरियाणा से लिया प्रशिक्षण
सरकारी नौकरी से लगने से पहले साल 2016 में धनराज लववंशी ने हरियाणा से दो साल तक डेयरी संचालन की ट्रेनिंग ली। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ साल 2018 में एक भैंस से डेयरी खोल ली। फिर भैंसों की संख्या बढ़ाकर 23 तक पहुंचा दी। अब धनराज दूसरे लोगों को भी डेयरी का निशुल्क प्रशिक्षण देते हैं।

धनराज लववंशी का परिवार
डेयरी संचालन करके लाखों रुपए कमा रहे धनराज के पिता कालूलाल लववंशी व छोटे रामविलास खेती करते हैं। मां केलाबाई हाउसमेकर है। धनराज की शादी चार साल पहले खुशबू से हुई। इनके एक बेटी है। खुशबू डेयरी का काम संभालती हैं।

एसी में रहती हैं धनराज की भैंस
धनराज की डेयरी की खास बात यह है कि यहां भैंस एसी में रहती हैं। बाकी सारा काम भी ऑटोमैटिक होता है। दूध निकलने के लिए मिल्क मशीन लगी हुई हैं। पानी के लिए ऑटोमैटिक वाटर सिस्टम लगा हुआ है। भैंस के बाउल में मुंह रखते ही वह अपने आप पानी से भर जाता है। भैंसों की साफ सफाई व स्वास्थ्य परीक्षण के लिए डॉ. पुखराज कालवा की मदद ली जाती है।












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