Success Story: ईंट-भट्टा मजदूर के 3 बेटे लगे सरकारी नौकरी, तीनों बिना कोचिंग इस ट्रिक से हुए कामयाब
motivational story in Hindi Rajasthan: राजस्थान के उदयपुरवाटी के पास गांव खींवासर में ईंट-भट्टा पर मजदूरी करने वाले फूलचंद बड़बरिया के तीन बेटे सरकारी टीचर बन गए।
laborer Family motivational story Udaipurwati: खुद कभी स्कूल नहीं गए, मगर शिक्षा की ताकत को बखूबी समझा। तभी तो तीन बेटों के स्कूल-कॉलेज की ओर बढ़ते कदम कभी नहीं रोके। आर्थिक तंगी को उनकी तालीम की राह में कभी रोड़ा नहीं बनने दिया है। इस शख्स का नाम है फूलचंद बड़बरिया।
फूलचंद बड़बरिया का जिक्र हम इसलिए कर रहे हैं कि इनकी मेहनत रंग लाई है। इन्होंने ईंट-भट्टों पर मजदूरी करके तीन बेटों को पढ़ने-लिखने का भरपूर अवसर दिया। नतीजा यह रहा है कि तीनों बेटों ने तरक्की कर ली। तीनों ही सरकारी नौकरी लग गए। वो भी बिना किसी कोचिंग के।

फूलचंद बड़बरिया राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गांव खींवासर के रहने वाले हैं। इनके तीन बेटों की सक्सेस स्टोरी की चर्चा तरफ हो रही है। तीनों बेटे शिक्षा विभाग में शिक्षक लगे हैं। दो बेटों का चयन तो एक ही महीने में हुआ था।
फूलचंद बड़बरिया ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति शुरू से खराब थी। हमारे पास न खुद का पक्का मकान था और ना ही खेती के लिए जमीन। ऐसे में खुद नहीं पढ़ सके तो पता चला कि बिना शिक्षा के कामयाबी हासिल करना कितना मुश्किल है।
ऐसे में फूलचंद बड़बरिया ने ईंट-भट्टों पर मजदूरी करके तीन बेटों सुनील, अनिल और महेंद्र व बेटी रवीना को खूब पढ़ाया। सबसे छोटी बेटी रवीना अभी कॉलेज की पढ़ाई कर रही है जबकि तीन बेटों शिक्षक बन चुके हैं। रवीना भी भाइयों के नक्शे कदम पर चलते हुए रीट की तैयारी करेगी। तीनों भाइयों की सफलता की ट्रिक यह थी कि तीनों ने मन लगाकर पढ़ाई की।
बता दें कि फूलचंद बड़बरिया के सबसे बड़े बेटे सुनील उदयपुर के गोगुंदा में द्वितीय शिक्षक पद पर कार्यरत हैं। जबकि पिछले दिनों सितंबर में छोटे बेटे महेंद्र का रीट लेवल प्रथम में चयन हुआ है। महेंद्र को पड़ोस के गांव सीथल के सरकारी स्कूल में पोस्टिंग मिली है। तीसरे बेटे अनिल का अक्टूबर में इतिहास के व्याख्याता पद पर चयन हुआ है। इसे सिरोही जिले के सरकारी स्कूल में पोस्टिंग दी गई है।












Click it and Unblock the Notifications