'मैं चॉकलेट नहीं खाऊंगा, लेकिन उन बच्चों को...', तुर्की भूकंप पीड़ितों को 9 साल के मासूम ने दान की अपनी गुल्लक
पूरी दुनिया के देशों की ओर से तुर्की और सीरिया के भूकंप पीड़ितों के लिए मदद भेजी जा रही है। ऐसे में एक 9 साल के बच्चे ने अपनी पॉकेट मनी से बचाए पैसों को भूकंप रिलीफ फंड में दान कर दिए हैं।

Turkey earthquake: तुर्की और सीरिया में आए विनाशकारी भूंकप में हजारों लोगों की जान गई। इस आपदा के बाद दुनियाभर में लोग दुखी हैं। चारों तरफ बस मलबा ही मलबा दिखाई दे रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर लोगों को भावुक कर रही है। मलबे में दबे महिलाओं, बुजर्गों और बच्चों की तस्वीरें झकझोर देने वाली है। ऐसे में पूरी दुनिया की तरफ से भूकंप के पीड़ितों के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाया गया है। इसी कड़ी में तुर्किए के 9 साल के एक बच्चे ने अपनी पॉकेट मनी से बचाए पैसों को भूकंप रिलीफ फंड में दान कर दिए।

मरने वालों की संख्या बढ़कर 11000 के पार
सोशल मीडिया पर एक 9 साल के बच्चे की दिल को छू लेने वाली तस्वीर वायरल हो रही है। मासूम बच्चा जो पिछले साल भूकंप से बच गया था। उसने अपनी पूरी गुल्लक की बचत को भूकंप से प्रभावित लोगों के लिए दान कर दी। इतना ही नहीं बच्चे ने तुर्की की स्थिति के बारे में एक इमोशनल लेटर भी लिखा है। अब तक तुर्किये और सीरिया में भूकंप के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 11000 के पार हो गई है।

डेमिर ने दान किया अपना गुल्लक
पिछले साल इसे बच्चे ने भी एक भूकंप को झेला था, नौ साल के इस बच्चे का नाम अल्परसलान एफे डेमिर है। एक तरफ जहां मलबे में फंसे लोगों को निकालने और घायलों के इलाज के लिए तुर्की की मदद के लिए दुनिया के ज्यादातर देश आगे आए हैं। इस बीच सालों से अपने गुल्लक में जुटाए पैसों को अल्परसलान एफे डेमिर ने दान कर दिए हैं। मासूम की दरियादिली देख हर कोई पिघल जाएगा। अल्परसलान ने अपनी मां से टीवी पर दिल तोड़ने वाले दृश्य देखने के बाद कहा कि वो अपनी बचत के पैसों को राहत कार्य के लिए दान करना चाहता है।

'मैं चॉकलेट नहीं खाऊंगा, लेकिन उन बच्चों को...'
इतना ही नहीं बच्चे ने एक इमोशनल लेटर भी लिखा, 'जब मेरे शहर दुज में भूकंप आया था तो मैं बहुत डर गया था, जब मैंने अपने कई शहरों में भूकंप के बारे में सुना तो मुझे यही डर लगा, इसलिए मैंने अपने बड़ों की तरफ से दिए गए पॉकेट मनी को वहां बच्चों के लिए भेजने का फैसला किया'। बच्चे ने अपने लेटर में आगे लिखा, "अगर मैं चॉकलेट नहीं खरीदूं तो कोई बात नहीं, वहां बच्चों को ठंड या भूख के परेशान नहीं होनी चाहिए...', अल्परसलान अपनी मां के साथ तुर्की रेड क्रीसेंट की ड्यूज शाखा गया और उसने अधिकारियों को अपने बचत के पैसे वहां सौंप दिए।












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