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बाबा को गांव वालों ने सुनाई सजा- काट दी चोटी

बाबा राम रहीम का मुद्दा मीडिया में छाया हुआ है। बाबा को कोर्ट ने शुक्रवार को रेप का दोषी पाया और सोमवार को सजा सुनाने की घोषणा की। भले ही अदालत ने फैसला सुनाने में तीन दिन का वक्त लिया हो लेकिन शहर के एक गांव की पंचायत ने एक फर्जी बाबा को महज एक घंटे में सजा सुना दी। बाबा को सजा क्या सुनाई गई ये हम आपको बाद में बताएंगे, पहले बताते हैं बाबा पर आरोप क्या थे।

बाबा को गांव वालों ने सुनाई सजा- काट दी चोटी

देश की राजधानी दिल्ली से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर एक बाबा को गांव की भैंस चोरी करने का दोषी पाया गया। कई गांव वालों ने आरोप लगाया कि ये बाबा गांव वालों की भैंस चोरी करने के साथ-साथ उनका दूध भी चोरी कर लेता था। गांव वालों को कई दिनों से चोर की तलाश थी। सरपंच द्वारा दिए गए एक आंकड़े के मुताबिक पिछले दो सालों में गांव से 16 भैंस, 24 बकरी और 14 टन दूध की चोरी हो चुकी है।

भैंसों की चोरी से पूरा गांव परेशान था। गांवों वालों का कहना है कि भैंस चोरी मामले को कई नेताओं के सामने भी उठाया जा चुका है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अपनी भैंसों को चोरी से बचाने के लिए गांव वालों ने कई ठोस कदम उठाए थे। हालांकि सरपंच ने सुरक्षा का हवाला देते हुए इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

कैसे पकड़ा गया फर्जी बाबा- पंचायत में गांव वालों को जानकारी देते हुए सरपंच ने बताया कि रविवार की रात गांव के दो लोग शराब लेने के लिए जा रहे थे, लेकिन जब उन्हें शराब नहीं मिली तो वो धरने पर बैठ गए और सरकार पर हमला करने लगे। तभी उन दोनों ने बाबा को एक घर में जाते देखा। कुछ ही देर में बाबा भैंस के साथ बाहर निकल रहे थे। तभी बाबा को पकड़ लिया गया।

बाबा ने की रिश्वत देने की कोशिश- कहा जाता है कि बाबा ने शराबियों को दो बोतल देने की बात भी कही, लेकिन दोनों शराबी ईमानदार थे। इसलिए उन्होंने बाबा की बात नहीं मानी और आरोपी बाबा को पंचायत के हवाले कर दिया।

बाबा ने दी सफाई- बाबा ने पंचायत के सामने अपनी सफाई में कहा कि वो चोरी नहीं कर रहे थे, वो तो गांव वालों की मदद कर रहे थे और भैंस को चारा खिलाने के लिए खेत में ले जा रहे थे।

बाबा को सुनाई सजा- बाबा ने कई बातें कही लेकिन सरपंच ने बाबा की किसी भी बात को मानने के इनकार कर दिया और सजा का एलान करते हुए बाबा की चोटी काटने का आदेश दिया गया। चोटी कटने के बाद बाबा ने कहा कि ये उनकी दस साल की मेहनत थी, गांव वालों ने ये अच्छा नहीं किया।
(इस खबर की सच्चाई का हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक कोई लेना देना नहीं है।)

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