मिनमिन, तरबूज और पॉटी
हॉस्टल में मास्टर जी ने कहा आज सभी बच्चों को नाश्ते में तरबूज खिलाया जायेगा। अचानक मिनमिन के मन में शरारत सूझी...
उसने मास्टर जी से पूछा- सर तरबूज को तरबूज ही क्यों कहते हैं?
मास्टर जी- क्योंकि वो तरबूज है।
मिनमिन- अच्दा तो पॉटी को पॉटी क्यों कहते हैं?
मास्टर जी- पता नहीं ये तो नाम है, जिसका जैसा पड़ गया वैसे ही पुकारा जाता है।
मिनमिन- तो क्यों न हम तरबूज को पॉटी और पॉटी को तरबूज कह कर पुकारें।
सभी बच्चे ठकाके लगा कर हसंने लगे। तभी...
राजन बोला- तो क्या रोड पर फलवाला कहेगा पॉटी 20 रुपए किलो, पॉटी 20 रुपए किलो
रजनीश- अरे तो लोग दुकान पर कहेंगे भईया ये पॉटी क्या रेट दी है।
लालजी- तो क्या सभी की प्लेट पर पॉटी काटकर परोसी जायेगी।
तभी मास्टर जी गुस्सा जाते हैं और कहते हैं- शांत हो जाओ, सब लोग पॉटी खाकर सो जाओ कल मुझे तरबूज निकालने के लिये जलदी उठना है।
# दूसरे दिन हिन्दी की क्लास में मास्टर जी की पैंट की जिप खुली देख कर बच्चे हंसने लगते हैं।
तभी मास्टर जी गुस्से में कहते हैं- ज्यादा हेहे करोगे तो बाहर निकाल कर खड़ा कर दूंगा।












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