जब आंटी के लिए छोड़नी पड़ी सीट

बंटी - (माँ से) - आज सुबह जब मैं पापा के साथ बस में आ रहा था तो उन्होंने एक आंटी के लिए मुझसे अपनी सीट छोड़ने को कहा।
माँ - बेटा यह तो अच्छी बात है। बड़ों का सम्मान करना चाहिए।
बंटी - मगर माँ, मैं तो पापा की गोद में बैठा हुआ था।
एक युवती ने अपनी दादी से कहा- कल से मैं कॉलेज नहीं जाऊँगी। मोहल्ले के
लड़के मुझे छेड़ते हैं।
अरे, बहाने मत बना। दादी ने उसे डाँटते हुए कहा, मैं भी तो उसी रास्ते से जाती हूँ।
मुझे तो कभी किसी ने नहीं छेड़ा।
पत्नी - शादी से पहले मेरा फिगर बिलकुल कोक की बोतल की तरह था।
पति- वो तो अब भी है। फर्क इतना है कि पहले 300 एमएल की थी, अब डेढ़ लीटर की है।












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