FACT CHECK: क्या चिकन खाने फैल रहा ब्लैक फंगस, जानें सोशल मीडिया पर किये जा रहे इस दावे का सच
दरअसल सोशल मीडिया पर एक खबर एनडीटीवी के स्ट्रीनशॉट के साथ चल रही है, जिसमें कहा गया है कि चिकन खाने से ब्लैक फंगस हो सकता है।
नई दिल्ली, 29 मई। क्या आप मांसाहारी हैं और क्या आपको चिकन खाना बेहद पसंद है? तो आपके लिए एक बेहद जरूरी सूचना है। दरअसल सोशल मीडिया पर एक खबर एनडीटीवी के स्ट्रीनशॉट के साथ चल रही है जिसमें बताया गया है कि इस वक्त चिकिन खाने से बचें क्योंकि यह कई राज्यों में जानलेवा ब्लैक फंगस का स्रोत हो सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि पंजाब सरकार ने पोल्ट्री फार्म को संक्रमित क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया है।

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने इस खबर को गलत बताया है। AFWA के मुताबिक एनडीटीवी ने इस तरह की कोई खबर प्रकाशित नहीं की है और स्क्रीनशॉट को बदला गया है। इसके अलावा, कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हमें पुष्टि की है कि काला कवक या म्यूकोर्मिकोसिस संक्रामक नहीं है यानि यह मनुष्यों या जानवरों के बीच संपर्क से नहीं फैल सकता है। यूनाइटेड स्टेट्स सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, म्यूकोर्मिकोसिस एक गंभीर लेकिन दुर्लभ फंगल संक्रमण है, जो म्यूकोर्मिसेट्स नामक मोल्ड्स के समूह के कारण होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस हमेशा वातावरण में मौजूद रहता है और मुख्य रूप से उन लोगों पर अटैक करता है जिन्हें पहले से स्वास्थ्य समस्याएं है और जिन लोगों की अत्यधिक दवाइयों का सेवन करने से प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है। फफूंद बीजाणुओं के संपर्क में आने से लोगों को यह बीमारी हो जाती है।
एम्स निदेशक ने बुलाई बैठक
जैसे ही कोविड रोगियों में ब्लैक फंगस के मामले सामने आए, एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और इसे रोकने के लिए आवश्यक सुझाव दिए। इस मीटिंग में न डॉ. गुलेरिया या किसी अन्य विशेषज्ञ ने यह नहीं कहा कि चिकन से मानव में ब्लैक फफूंद फैल सकता है।
वहीं आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक ने इस मामले पर कहा कि ब्लैक फंगस वातावरण में मौजूद रहता है और इसलिए इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह चिकन को भी संक्रमित कर सकता है, लेकिन यह किसी के संपर्क में आने से नहीं फैल सकता है। ज्यादातर लोग इसे अपनी नाक से सांस लेने से संक्रमित होते हैं। इसके अलावा यह उन लोगों को संक्रमित कर सकता है जिनकी इम्यूनिटी काफी कम है।
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वहीं हैदराबाद के अपोलो अस्पताल में संक्रामक रोग सलाहकार डॉ. सुनीता नरेड्डी ने भी इस दावे का आधारहीन बताया है। उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस से संक्रमित जानवर बुरी तरह से गंध करेगा और कोई भी व्यक्ति इसका सेवन नहीं कर पाएगा। इसलिए ब्लैक फंगस से संक्रमित चिकन खाने का तो सवाल ही नहीं उठता।

Fact Check
दावा
yes
नतीजा
fake












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