Fact Check: 'दिल्ली चलो' किसान आंदोलन में सिख युवक का वॉटर कैनन से सामना, जानिए वायरल वीडियो का सच?

Fact Check News: हरियाणा-पंजाब की शंभू बॉर्डर पर किसानों का विरोध मार्च जारी है। एक बार बार फिर हजारों की संख्या में किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोला है। हालांकि 13 फरवरी को 'दिल्ली चलो' मार्च उनको सफल नहीं हुआ और शंभू बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने उनका दिल्ली कूच असफल कर दिया है।

इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वॉटर कैनन का बौछारों का एक सिख युवक डटकर सामना कर रहा है, जिसको लेकर दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो हाल के किसान आंदोलन का है। ऐसे में क्या है इस वीडियो की सच्चाई जानिए?

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दरअसल, किसान आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली की सीमाओं को छावनी में बदल दिया है। हरियाणा से आने वाली बॉर्डर पर भारी बैरिकेड्स लगा दिए हैं। जमीनों पर नुकीले लोहे डाले हुए हैं। इसी के साथ पुलिस भर का भारी अमला मौजूद हैं। इसी के साथ 13 फरवरी को शंभू बॉर्डर पर किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन के साथ ड्रोन से आंसू गैस के गोले भी दागे थे।

ऐसे में किसान आंदोलन से जोड़कर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक शख्स को वॉटर कैनन के दबाव का सामना करते हुए दिखाया गया है। इस वीडियो को दिल्ली में चल रहे किसानों के प्रदर्शन से जोड़ा जा रहा है।

वीडियो को एक्स पर वीना जैन नाम की यूजर ने शेयर किया, जिसके कैप्शन में लिखा था- "किसानों को आपके एजेंडे की परवाह नहीं है, वे लड़ना जानते हैं।"

ऐसे ही एक और पूजा क्वीन नाम की एक यूजर ने भी इसी वीडियो का कैप्शन "भारतीय किसानों की ताकत।" के साथ साझा किया। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो दिल्ली चलो मार्च का है। साथ ही खबर लिखे जाने तक इस वीडियो को प्लेटफॉर्म पर एक लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका था।

जानिए वायरल वीडियो का सच?

हालांकि जब हमारी टीम ने इस वीडियो की सच्चाई की पड़ताल की तो पता चला कि यह पुराना वीडियो है और इसका मौजूदा किसान विरोध प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। यह वीडियो किसानों के विरोध प्रदर्शन 2020 से जुड़ा है, जब हजारों किसानों ने केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन किया था।

जब इस वीडियो के कीफ्रेम पर गूगल लेंस लगाया तो हमें कई प्लेटफॉर्म पर ऐसे ही वीडियो मिले। यूट्यूब पर शेयर किए गए इनमें से एक वीडियो में तारीख का भी जिक्र किया गया था।

वीडियो को 11 दिसंबर 2020 को साझा किया गया था। इससे साफ पता चलता है कि इस वीडियो का दिल्ली चलो मार्च 2024 से कोई संबंध नहीं है। यह वीडियो पंजाब के सिंधु बॉर्डर के पहले किसान विरोध मार्च का है। हमारी पड़ताल में हमने पाया कि वायरल वीडियो, यह वीडियो इस समय हो रहे किसान आंदोलन का नहीं है, बल्कि यह सिंघु बॉर्डर पर साल 2020 के किसान आंदोलन का है।

Fact Check

दावा

वीडियो को किसानों के दिल्ली मार्च विरोध प्रदर्शन का बताया गया है।

नतीजा

दावा पूरी तरह से भ्रामक है। यह वीडियो पंजाब के सिंधु बॉर्डर के पहले किसान विरोध मार्च का है।

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फैक्ट चेक करने के लिए हमें [email protected] पर मेल करें

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