Fact Check: बच्चों की वैक्सीन पर वायरल हो रहा फर्जी वीडियो, सरकार ने बताया सच
नई दिल्ली, 18 जनवरी: देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर का कहर जारी है। वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि कोरोना से बचने के लिए वैक्सीनेशन से अच्छा उपाय कोई नहीं है। पहले तो 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही थी, लेकिन इस महीने से 15 से 18 आयुवर्ग के लिए भी वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू हो गया। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे स्कूल/कॉलेज जाने वाले बच्चों को सुरक्षा मिलेगी, लेकिन बहुत से अराजक तत्व इस मुश्किल घड़ी में भी अफवाह फैला रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो महाराष्ट्र का है। उसमें बहुत से लोग पोस्टर लिए खड़े हैं। उनका दावा है कि 15 से 18 आयुवर्ष के बच्चे वैक्सीन लेने के बाद बीमार पड़ रहे हैं। इसके अलावा हाल ही में कुछ बच्चों की मौत हुई। ये मौत वैक्सीन लेने के कुछ ही दिनों के अंदर हुई। वो इसे प्राकृतिक मौत नहीं बल्कि हत्या बता रहे हैं। वीडियो में एक शख्स ने कहा कि पब्लिक को सवाल पूछना पड़ेगा कि ये क्यों मर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने वैक्सीन लगाने वालों को सजा देने की मांग की।
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ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा और बहुत से लोग इसे सच मानकर अपने बच्चों को वैक्सीन नहीं लगवा रहे। जिस पर अब भारत सरकार के प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो ने सफाई दी है। पीआईबी के मुताबिक वायरल हो रहा दावा पूरी तरह से झूठा है। वैक्सीन को बच्चों को देने से पहले पूरी तरह से ट्रायल किया गया था। इसके अलावा बड़े विशेषज्ञों ने भी इसे 15-18 आयुवर्ग को देने की सलाह दी थी। जिस पर सरकार ने उनको टीका लगाना शुरू किया। इस वजह से लोग फर्जी दावों के चक्कर में ना पडे़ं और वो अपने बच्चों को वैक्सीन की दोनों डोज लगवाएं।

Fact Check
दावा
वैक्सीन से हो रही बच्चों की मौत
नतीजा
वीडियो में किया गया दावा फर्जी है।












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