Fact Check: 'मैं एप्स्टीन से मिला..', अमेरिकी अय्याश के मामले में हरदीप पुरी ने कितना सच बताया? पूरी टाइमलाइन
Fact Check: आज (11 फरवरी 2026) लोकसभा में सियासी माहौल अचानक गरमा गया। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का जोरदार खंडन किया। राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान पुरी का नाम कुख्यात फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से जोड़ा, जिसके बाद सदन में राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
जेफरी एपस्टीन का जिक्र क्यों हुआ?
जेफरी एपस्टीन वह शख्स था जो बाद में जो पूरी दुनिया में नेताओं, बिजनेसमेन और पावरफुल लोगों के साथ मिलकर सेक्स रैकेट चला रहा था। इसमें कई 10 देशों के 80 से ज्यादा नेताओं का नाम आ चुका है और यूरोप में इस्तीफे भी होने लगे हैं। एपस्टीन के आईलैंड पर नाबालिक बच्चियों का बलात्कार किया जाता था जिनकी उम्र 6 से लेकर 25 साल तक बताई गई है। इसी को लेकर राहुल गांधी ने अपने संबोधन में दावा किया कि हरदीप सिंह पुरी की एपस्टीन से मुलाकात हुई थी। इसी दावे को लेकर विवाद खड़ा हुआ और राजनीतिक बहस तेज हो गई।

एपस्टीन से मुलाकातें प्रोफेशनल- पुरी
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के आरोप भ्रामक हैं और पूरी तरह राजनीति से प्रेरित हैं। पुरी ने साफ किया कि एपस्टीन से उनकी जो भी मुलाकातें हुई थीं, वे केवल पेशेवर कारणों से थीं और उनका किसी भी तरह के अवैध या आपराधिक मामले से कोई संबंध नहीं था।
IPI के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे पुरी
मंत्री पुरी ने बताया कि उनकी मुलाकातें कई साल पहले हुई थीं, जब वे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) से जुड़े हुए थे। उस समय वे एक आधिकारिक हैसियत से काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें IPI के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थीं, न कि किसी निजी या सामाजिक कार्यक्रम में।
'तीन या चार बार ही हुई मुलाकात'
पुरी ने स्पष्ट किया कि IPI में रहते हुए उन्होंने एपस्टीन से अधिकतम तीन या चार बार ही मुलाकात की थी। उन्होंने कहा, 'IPI में मेरे बॉस एपस्टीन को जानते थे, और मैं उनसे सिर्फ कुछ मौकों पर एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में मिला था। हमारी बातचीत का उनके आरोपित अपराधों से बिल्कुल भी कोई लेना-देना नहीं था।'
अपराध उजागर होने से पहले की मुलाकातें
मंत्री ने यह भी जोर देकर कहा कि ये बैठकें उस समय हुई थीं जब एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियां सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई थीं। उन्होंने कहा कि इन मुलाकातों में कोई व्यक्तिगत या सामाजिक पहलू नहीं था। पुरी ने कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वे तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं और संसदीय टकराव के माहौल में अनावश्यक विवाद पैदा कर रहे हैं।
सियासी हलचल तेज
राहुल गांधी की लोकसभा में की गई टिप्पणियों के बाद तुरंत राजनीतिक हलचल शुरू हो गई। विपक्ष 'एपस्टीन फाइल्स' का हवाला देकर अपने हमले और तेज कर रहा है। वहीं सत्ता पक्ष हरदीप सिंह पुरी के स्पष्टीकरण को आधार बनाकर इन आरोपों को 'निराधार' बता रहा है और कह रहा है कि यह केवल प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश है। इस पूरे मामले ने संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह बहस छेड़ दी है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बना रह सकता है।
एपस्टीन पर पहला मामला कब हुआ था दर्ज?
NPR (National Public Radio) की रिपोर्ट के मुताबिक 2005 में जैफ्री एप्स्टीन के खिलाफ फ्लोरिडा की पाम बीच पुलिस ने पहली बार क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन शुरू की थी। जिसमें पीड़िता एक 14 साल की बच्ची थी जिसके साथ एप्स्टीन ने बॉडी मसाज के नाम पर दुर्व्यवहार किया था। इसके बाद 19 जुलाई 2006 को पाम बीच काउंटी (फ्लोरिडा) की एक ग्रैंड जूरी ने जेफरी एपस्टीन पर वेश्यावृत्ति के लिए उकसाने (solicitation of prostitution) के एक राज्य स्तरीय गंभीर अपराध (state felony) का आरोप तय किया।
30 जून 2008: एपस्टीन ने राज्य स्तर के आरोपों को स्वीकार कर लिया। उन्होंने वेश्यावृत्ति के लिए उकसाने और 18 वर्ष से कम उम्र की नाबालिग के साथ वेश्यावृत्ति के लिए उकसाने के आरोपों में दोषी होने की बात मानी। उसे 18 महीने की सजा सुनाई गई और एक न्यूनतम सुरक्षा वाली जेल (minimum-security facility) में भेजा गया।

7 जुलाई 2008: 'Jane Doe' नाम से पहचानी गई एक पीड़िता ने संघीय अदालत में Crime Victims' Rights Act के तहत मुकदमा दायर किया। उनका आरोप था कि उन्हें और अन्य पीड़ितों को यह जानकारी नहीं दी गई थी कि एपस्टीन के मामले का निपटारा एक plea deal (समझौते) के जरिए किया जा रहा है।

22 जुलाई 2009: एपस्टीन को 13 महीने से भी कम समय जेल में बिताने के बाद रिहा कर दिया गया, जबकि उसे 18 महीने की सजा मिली थी।
सितंबर 2009: Non-prosecution deal (अभियोजन न करने का समझौता) पर हस्ताक्षर होने के दो साल बाद, फ्लोरिडा के एक जज ने आदेश दिया कि एपस्टीन को संघीय प्रतिरक्षा (federal immunity) देने वाले दस्तावेज को सार्वजनिक किया जाए। यह आदेश पीड़ितों और समाचार संस्थानों द्वारा दायर मुकदमों के जवाब में दिया गया था।
नोट: ये आंकड़े NPR (National Public Radio America) की रिपोर्ट से लिए गए हैं। जिसका लिंक नीचे दिया गया है-
https://www.npr.org/2025/07/25/nx-s1-5478620/jeffrey-epstein-crimes-timeline-legal-case
हरदीप सिंह पुरी कब थे IPI में?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने जून 2013 से मार्च 2017 तक (2 साल 10 महीने) International Peace Institute में बतौर वाइस प्रेसिडेंट एंड सेक्रेटरी जनरल के पद पर सेवाएं दी थी।
जैफ्री एप्स्टीन को सजा 30 जून 2008 को हुई थी, जबकि हरदीप सिंह पुरी जून 2013 से मार्च 2017 तक IPI में पदस्थ थे। बकौल पुरी, वे एप्स्टीन से IPI में पदस्थ रहने के दौरान मिले थे। हो सकता है कि हरदीप सिंह पुरी को इस बात की जानकारी न हो, लेकिन जब वे एप्स्टीन से मिले थे उससे तकरीबन 5-7 साल पहले एप्स्टीन यौन अपराध से जुड़े मामले में 13 महीने की सजा जेल में काटकर बाहर आ चुका था।
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Fact Check
दावा
Yes
नतीजा
अर्धसत्य
Rating
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