NEET 2025: मेडिकल बोर्ड की मनमानी, SC के आदेशों के बावजूद विकलांग उम्मीदवारों के साथ नाइंसाफी!
NEET 2025 पास करने के बाद डॉक्टर बनने का सपना देख रहे कई विकलांग उम्मीदवारों को एक और बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। देशभर के मेडिकल बोर्ड्स ने सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद कई योग्य उम्मीदवारों को MBBS के लिए अयोग्य ठहरा दिया है।
आरोप है कि बोर्ड न तो नई गाइडलाइन को समझ पा रहे हैं और न ही उन्हें सही प्रशिक्षण मिला है। ऐसे में उम्मीदवारों के पास अदालत का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

नई गाइडलाइन पर अमल नहीं
19 जुलाई को जारी अंतरिम गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि विकलांगता के प्रतिशत के बजाय उम्मीदवार की वास्तविक क्षमता पर जोर दिया जाना चाहिए। लेकिन उम्मीदवारों का आरोप है कि मेडिकल बोर्ड अभी भी पुराने तरीके से ही मूल्यांकन कर रहे हैं।
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एक व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले उम्मीदवार ने बताया कि बोर्ड ने उनसे चलने, खड़े होने और सीढ़ियां चढ़ने जैसे सात शारीरिक कार्य करने को कहा। वहीं, एक अन्य उम्मीदवार जिनकी कुछ उंगलियां नहीं हैं, उन्हें तमिलनाडु में अयोग्य करार दिया गया, लेकिन केरल में ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग के दौरान उन्हें चुना गया।
मेडिकल बोर्ड की संख्या सीमित
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में आदेश दिया था कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में कम से कम एक मेडिकल बोर्ड होना चाहिए। लेकिन फिलहाल केवल 11 राज्यों में 16 केंद्र ही काम कर रहे हैं। इससे उम्मीदवारों को यात्रा, ठहरने और खाने पर भारी खर्च उठाना पड़ रहा है।
संवेदनशीलता और प्रशिक्षण की कमी
'डॉक्टर्स विद डिसएबिलिटीज: एजेंट्स ऑफ चेंज' के संस्थापक डॉ. सतेंद्र सिंह का कहना है कि मेडिकल बोर्ड के सदस्यों में विकलांग उम्मीदवारों को लेकर संवेदनशीलता नहीं है। उन्होंने बताया कि चेन्नई के एक बोर्ड ने एक उम्मीदवार को "व्हीलचेयर पर बंधा हुआ मरीज" कहकर अयोग्य घोषित कर दिया। डॉ. सिंह ने सवाल उठाया कि जब बोर्ड उम्मीदवार को मरीज मानते हैं तो चयन कैसे करेंगे?
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि बोर्ड के सदस्यों को विशेषज्ञों और विकलांग डॉक्टरों द्वारा प्रशिक्षित किया जाए और हर बोर्ड में कम से कम एक विकलांग डॉक्टर हो। लेकिन न तो ऐसा प्रशिक्षण हुआ है और न ही किसी बोर्ड में विकलांग डॉक्टर को शामिल किया गया है।
नाम बदलने का वादा भी अधूरा
डॉ. सिंह ने बताया कि NMC अदालत में बोर्ड का नाम "डिसएबिलिटी असेसमेंट बोर्ड" से बदलकर "एबिलिटी असेसमेंट बोर्ड" करने का वादा किया था, ताकि मूल्यांकन का फोकस बदल सके। लेकिन नई गाइडलाइन में यह बदलाव नहीं किया गया।
अदालत हीं आखिरी सहारा
NEET 2025 की काउंसलिंग 21 जुलाई से शुरू हो चुकी है, लेकिन न तो मेडिकल बोर्ड प्रशिक्षित हुए हैं और न ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को पूरी तरह लागू किया गया है। डॉ. सिंह ने कहा कि विकलांग उम्मीदवारों के पास अब अदालत जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, लेकिन हर कोई ऐसा करने में सक्षम नहीं है।
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