Narak Chaturdashi 2020: नरक चतुर्दशी पर क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान?

Narak Chaturdashi 2020: 14 नवंबर को रूप चतुर्दशी आ रही है। इस दिन हिंदू परिवारों में सूर्योदय के पूर्व पूरे शरीर पर उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है। इसके पीछे कई शास्त्रीय मान्यता होने के अलावा वैज्ञानिक कारण भी है। शास्त्रीय परिभाषा के अनुसार इस प्रक्रिया को अभ्यंग स्नान कहा जाता है। यह एक अत्यंत पवित्र स्नान होता है जिसमें हल्दी, चंदन, दही, बेसन, तिल का तेल, जड़ी-बूटियां आदि मिलाकर एक लेप तैयार किया जाता है, जिससे पूरे शरीर की मालिश की जाती है। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण।

नरक चतुर्दशी पर क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान?

यह है धार्मिक कारण

हिंदू परंपराओं के अनुसार अभ्यंग स्नान के लिए अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियां मिलाकर बनाए जाने वाले लेप की मालिश से शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और इससे शरीर को नूतनता प्राप्त होती है। यह स्नान मुख्यत: कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है, क्योंकियह यमराज का दिन होता है और वे मनुष्यों के शरीर को नूतनता प्रदान करते हैं। अभ्यंग स्नान से यमराज प्रसन्न होकर मनुष्य को रूप-सौंदर्य और शरीर को नया बनाने का आशीर्वाद देते हैं।

यह है वैज्ञानिक कारण

नरक चतुर्दशी के दिन किए जाने वाले पारंपरिक अभ्यंग स्नान को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बताया गया है। वैज्ञानिकों का मत है कितिल के तेल की मालिश से शरीर को गर्मी प्राप्त होती है। इससे शरीर में पित्त का स्तर कम होता है। दिवाली के अलावा भी सर्दियों के दिनों में तिल के तेल से पूरे शरीर की मालिश करने से सर्दी संबंधी रोग दूर होते हैं। तेल लगाने से त्वचा पर्याप्त मॉइश्चराज होती है। त्वचा से दूषित तत्व और डेड स्किन को हटाकर त्वचा की सफाई होती है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। तिल का तेल त्वचा में गहराई तक जाने से त्वचा की कोमलता और रौनक बढ़ती है। मालिश से शरीर में रक्त का प्रवाह भी अच्छा होता है। गर्म तेल से सिर की मालिश करने से तनाव दूर होता है और मन शांत होता है। अभ्यंग स्नान नसों को राहत पहुंचाकर नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाता है। जिससे दिमाग से जुड़ी समस्याएं भी दूर होती हैं। मालिश से मसल्स को आराम मिलता है।

कैसे किया जाता अभ्यंग स्नान

  • नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उठ जाएं। नित्यकार्यो से निवृत्त होकर पूरे शरीर की मालिश तिल के तेल से करें। तेल की कुछ बूंदें लेकर अपने सिर की भी मालिश करें।
  • मालिश करने के बाद कम से कम 15 से 20 मिनट तक शरीर को रिलैक्स करते हुए शांत चित्त होकर बैठें। इससे तेल त्वचा में अच्छी तरह समा जाएगा।
  • 20 मिनट बाद बेसन में हल्दी, चंदन पाउडर, तिल का पाउडर, दही मिलाकर उबटन बनाएं और इसे पूरे शरीर पर हल्के हाथों से लगाएं।
  • पूरे शरीर पर अच्छे से उबटन लगाने के बाद इसे 15-20 मिनट सूखने दे।
  • इसके बाद गर्म पानी से स्नान कर लें।

तैलाभ्यंग मुहूर्त

14 नवंबर को सूर्योदय पूर्व 5.25 बजे तैलाभ्यंग का मुहूर्त रहेगा। इस समय में तेल और उबटन लगाकर स्नान कर लेना चाहिए। इससे वर्ष भर सौंदर्य और आरोग्य बना रहता है।

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