Surya Grahan 2025: सीधी आंखों से ना देखें सूर्य ग्रहण वरना गंवा देंगे रोशनी, शांति के लिए करें ये उपाय
Surya Grahan 2025 : आज साल का पहला सूर्य ग्रहण है, हालांकि इसका दीदार भारतवासी नहीं कर पा रहे हैं। केवल उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी एशिया के लोग इस खगोलीय घटना के गवाह बने हैं। आपको बता दें कि जब चंद्रमा बीच में आकर सूर्य को आंशिक रूप से ढक लेता है तब सूर्य की रोशनी सीधे पृथ्वी पर पहुंच नहीं पाती है, तब सूर्य ग्रहण होता है।
इस दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक रेखा में आ जाते हैं लेकिन इस बार ये सीध में नहीं है इसलिए ये आंशिक ग्रहण है, पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं है। इस खगोलीय घटना का वैज्ञानिक बेसब्री से इंतजार करते हैं क्योंकि इसके जरिए वो ब्रह्मांड को जानने की कोशिश करते हैं।

आपको बता दें कि अमेरिका और कनाडा में, कई लोग सूर्योदय के समय ग्रहण का अनुभव करेंगे तो वहीं पश्चिमी यूरोप और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में, यह सुबह के मध्य से देर तक दिखाई देगा। जब यह पूर्वी यूरोप और उत्तरी एशिया में पहुंचेगा, तब तक दोपहर या शाम हो चुकी होगी।
ग्रहण दोपहर 2:20:43 बजे शुरू हुआ (Surya Grahan 2025)
भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार, ग्रहण दोपहर 2:20:43 बजे शुरू हो चुका है , शाम 4:17:27 बजे चरम पर होगा और शाम 6:13:45 बजे समाप्त होगा। भारत के लोग इंटरनेट के जरिए इसका आनंद उठा सकते हैं।
ग्रहण के दौरान सुरक्षा उपाय (Surya Grahan 2025)
- आंशिक सूर्यग्रहण को देखने के लिए सावधानी की आवश्यकता होती है। सीधे सूर्य को देखने से आपकी आंखें खराब हो सकती हैं।
- सूर्यग्रहण को देखने के लिए "ग्रहण चश्मे" (ISO 12312-2 मानक) या पिनहोल प्रोजेक्टर का उपयोग करें।
- सौर फ़िल्टर के बिना कैमरे या दूरबीन जैसे ऑप्टिकल उपकरणों का उपयोग भी सूर्यग्रहण को देखने के लिए ना करें।
सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या को लगता है (Surya Grahan 2025)
सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या को लगता है, आज शनिश्चरी अमावस्या है इसलिए आज ग्रहण खत्म होने के बाद हर किसी को गरीबों को दान देना चाहिए और शनिदेव के मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने से शनिदेन प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-शांति का आशीष भी देते हैं। आज के दिन शनिदेव की आरती जरूर करनी चाहिए।
शनिदेव की आरती (Surya Grahan 2025)
- जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
- सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥
- ॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
- श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।
- नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥
- ॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
- क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।
- मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥
- ॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
- मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
- लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥
- ॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
- देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।
- विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
- ॥ जय जय श्री शनिदेव..॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बात करें।












Click it and Unblock the Notifications