Sun or Surya Grah: जानिए सूर्य का विभिन्न भावों में फल

लखनऊ। अक्षय भण्डार का कारक सूर्य स्वयं में एक सत्ता हैंै। जिसके बगैर किसी का भी जीवन संभव नहीं है। जीवन का आधार ही सूर्य है। मनुष्य, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे आदि सभी सूर्य की उर्जा के बगैर अधूरे है। सूर्य को ज्योतिष में पिता की संज्ञा दी गई, सूर्य नवग्रहों का राजा भी है। सूर्य की महत्ता का जितना बखान किया जाए उतना ही कम है।

चलिए जानते है सूर्य कुण्डली के द्वादश भावों में बैठकर क्या-क्या फल देता है...

सूर्य कुण्डली

सूर्य कुण्डली

जिस व्यक्ति की कुण्डली में लग्न में सूर्य हो वह कृपण, व्यापारी, धनी, धार्मिक, कुटुम्बचिन्तायुक्त, शरीर व मन में बेचैनी रहती है। पित्तरोगी, क्रोधी, रक्तवर्ण, स्त्री को कष्ट, मित्रविरोधी, ऑफीसरों का प्रेमी होता है। जब धनेश सूर्य धन भाव में हो तो मनुष्य, धनिक, लोभी, चतुर, अधिकारियों से गठजोड़ रखने वाला, इधर-उधर करने वाला, लम्बा, कृष्णवर्ण, सदैव भूखा, अपराधी, नीच कर्मरत, पापी, अनर्थकर्ता, साहसी, राज्यसेवक, दुष्यकर्म द्वारा संग्रह करके अन्त में गॅवाने वाला होता है।यदि धनेश सूर्य तीसरे घर में हो तो मनुष्य पराक्रमी, व्यवसायी, कलाहीन, विनयरहित, निष्ठुर, बन्धुविरोधी, कर्णरोगी, पुलिस सेना में राज्य सम्मान अपनी दशा में देता है।

 धनेश सूर्य सप्तम भाव में हो तो...

धनेश सूर्य सप्तम भाव में हो तो...

यदि धनेश सूर्य छठे भाव में हो तो मनुष्य शत्रुनाशक, नौकरादि से हानि, देशाटन में परेशानी, अस्वस्थ्य, स्वतंन्त्र पेशा, कामी, अभिमानी, बली, राज्यपूज्य, मध्यमकोटि की जीवन रहता है। जिसका धनेश सूर्य सप्तम भाव में हो तो मनुष्य पित्त, गर्मी का रोगी, बड़ा विलासी, सुन्दर स्त्री वाला, रोगी स्त्री, वियोगमय, कलहारी, व्यग्र, चिन्तायुक्त तथा स्त्री जाति से अपमान मिलता है।जब धनेश सूर्य अष्टम भाव में हो तो मनुष्य सदा रोगी, अल्पायु, अपयश, इष्ट मित्रों से अनबन, मन्द दृष्टि, शत्रुयुक्त, क्रोधी, निर्बल, हिंसक, पाखण्डी, प्रेम करने में अधीर, निरूद्यमी होता है।

मनुष्य को शादी में धन मिलता है

यदि धनेश सूर्य नवम भाव में हो तो मनुष्य को शादी में धन मिलता है और अन्तिम समय में यश प्राप्त करता है। कविता या व्यापार में, बुद्धि धन, दार्शनिकता, वकालत, अध्यापक से भाग्योदय, दानी, उपकारी, बन्धु बान्धव द्वेषी, तीर्थयात्रा प्रेमी, सत्कर्मी, रक्तपिक्त दोषी, शरीर में कष्ट, मानसिक चिन्ता रहती है।जिसका धनेश सूर्य दशमगत हो तो मनुष्य राज्यसेवी, मातृकष्ट, पिता से लाभ, अड़चनों के बाद व्यापार में सफलता प्राप्त मिलती है। ह्रदय रोग व घर की चिन्ता, परोपकारी, वाहन सुख से वचिंत रहता है।

जब धनेश सूर्य एकादश में हो तो....

जब धनेश सूर्य एकादश में हो तो....

जब धनेश सूर्य एकादश में हो तो मनुष्य को भाई बन्धु, इष्टमित्रों से सुख किन्तु सन्तान सुख नहीं होता, धनिक, व्यापारी, राज्यसेवी, वस्तुसंग्रही, साहित्य प्रेमी, समाजसेवी, देशाटन प्रिय होता है।यदि धनेश सूर्य द्वादश भाव में हो तो मनुष्य समाज से पृथक रहने वाला, बन्धुद्रोही, विफल व्यापारी, कृपण, पाखण्डी, विदेश में भाग्योदय, मन्ददृष्टि, पिताविरोधी, विलासी, राजदंडित, क्रोधी, देशाटनादि में व्यर्थ धन खर्च करने वाला होता है।

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