गुरु पुष्य और सर्वार्थसिद्धि योग के साथ विदा होगा साल 2020
Pushya nakshatras Effect: वर्ष 2020 पूरी दुनिया में कोरोना महामारी के लिए हमेशा याद किया जाएगा। पूरे वर्ष इस महामारी ने दुनिया में उथल-पुथल मचाकर रख दी। भारत में भी लाखों नौकरियां चली गई, लाखों-करोड़ों छोटे-बड़े बिजनेस बंद हो गए। लाखों लोगों की जान चली गई। लेकिन सुखद यह है कि अनेक देशों ने इस महामारी का वैक्सीन तलाश लिया गया है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस बीमारी को रोकने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकेगा। उथल-पुथल भरे साल का आखिरी दिन अनेक शुभ संयोंगों से भरा हुआ है।

पौष कृष्ण प्रतिपदा 31 दिसंबर गुरुवार को पुष्य नक्षत्र होने से गुरु पुष्य का शुभ योग बना है। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग भी रहेगा। हालांकि पुष्य नक्षत्र 31 दिसंबर को सायं 7.47 बजे से प्रारंभ होगा और यह अगले दिन 1 जनवरी 2021 को रात्रि 8.14 बजे तक रहेगा।
क्या करें गुरु पुष्य के संयोग में
- गुरु पुष्य नक्षत्र में किए गए कार्य स्थायी होते हैं। खरीदारी के लिए यह नक्षत्र सर्वोत्तम माना गया है। इसमें की गई खरीदी भी स्थायी होती है।
- गुरु पुष्य में भगवान विष्णु की पूजा करने से समस्त भोग-सुख प्राप्त होते हैं।
- यह नक्षत्र बृहस्पति और शनि दोनों का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों ग्रहों की पीड़ा इस दिन दूर की जा सकती है।
- अविवाहित युवक-युवतियां जिनके विवाह में बाधा आ रही है, वे इस दिन केले के पेड़ की पूजा करें। केले की जड़ निकालकर उसे गंगाजल और कच्चे दूध से धोकर हल्दी में लपेटकर पीले कपड़े में बांधकर अपने पास रखें। इससे विवाह की बाधा दूर होती है।
- इस दिन हल्दी की कच्ची गांठ को पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन-सुख की प्राप्ति होती है।
- बृहस्पति ग्रह की पीड़ा दूर करने और बृहस्पति को मजबूत बनाने के लिए इस दिन भगवान विष्णु का श्रंगार पीले पुष्पों से करें।












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