बहुत खास है सितंबर माह, सभी नौ ग्रहों की स्थिति में हो रहा है बदलाव
नई दिल्ली। सितंबर 2020 का यह माह ज्योतिषीय और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। कारण यह कि इस माह में सभी नौ ग्रहों की स्थिति में बदलाव होने जा रहा है। इस माह छह ग्रह अपनी राशि बदल रहे हैं। इनमें शुक्र, बुध, सूर्य, राहु, केतु और चंद्र (प्रत्येक ढाई दिन में बदलता ही है राशि)। शुक्र और बुध तो इस एक ही माह में दो-दो बार अपनी राशि बदल लेंगे। वहीं तीन ग्रह वक्री-मार्गी होंगे। ये ग्रह हैं मेष वक्री होगा और गुरु व शनि मार्गी होने जा रहे हैं। सभी ग्रहों का बदलना अपने-आप में अनूठी घटना है और इनका सामान्य जनजीवन के अलावा प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और महंगाई पर विशेष प्रभाव होने वाला है।

क्या होगा परिणाम
इतने बड़े पैमाने पर ग्रहों की राशियों में होने वाले परिवर्तन के फलस्वरूप प्रत्येक जातक का जीवन प्रभावित रहने वाला है। निजी संबंधों, पारिवारिक जीवन, स्वास्थ्य, कामकाज, नौकरी, व्यापार-व्यवसाय प्रभावित होंगे। जिन लोगों की जन्म कुंडली में कोई ग्रह वक्री है या पाप ग्रहों से दृष्ट है उन्हें इन परिवर्तनों का बुरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। देश की बात करें तो पर्यावरण और मौसम पर इसका जबर्दस्त प्रभाव होने वाला है। प्राकृतिक आपदाएं, बाढ़, नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंचने से जनजीवन प्रभावित, जान-माल की हानि होगी। वायुयान दुर्घटना, देशों में टकराव बढ़ेगा।

ये ग्रह बदल रहे हैं राशियां
- 1 सितंबर को शुक्र कर्क राशि में
- 2 सितंबर को बुध कन्या राशि में
- 16 सितंबर से सूर्य कन्या राशि में
- 22 सितंबर को बुध तुला में
- 23 सितंबर को राहु वृषभ राशि में
- 23 सितंबर को केतु वृश्चिक राशि में
- 27 सितंबर को शुक्र सिंह राशि में

ये ग्रह होंगे वक्री-मार्गी
- 10 सितंबर को मेष राशि में मंगल वक्री
- 13 सितंबर को धनु राशि में गुरु मार्गी
- 29 सितंबर को शनि मार्गी होने जा रहे हैं।
रक्षा के लिए ये उपाय जरूर करें
ग्रहों की राशियों और स्थितियों में बदलाव के कारण प्रभावित प्रत्येक राशि के जातक को होना है। यदि कुछ खास उपाय करेंगे तो संकटों से बचा जा सकता है।
- प्रत्येक व्यक्ति सितंबर के पूरे माह प्रात: सूर्योदय के समय जागकर स्नानकर सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें।
- प्रतिदिन शिवलिंग पर कच्चे दूध में जल और शक्कर डालकर अर्पित करें।
- नवग्रह स्तोत्र या नवग्रह कवच का पाठ नियमित रूप से करते रहें।
- दरिद्रनारायण की सेवा और भिखारियों को भोजन करवाने से पुण्य प्राप्त होगा।
- गाय को हरा चारा, श्वान को रोटी, जलचरों के लिए आटे की गोलियां भी डाली जा सकती है।












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