मंत्र जप में इन बातों का रखेंगे ध्यान तो बन जाएंगे काम
हम देखते हैं कि कई लोगों के मंत्र जप का तुरंत प्रभाव होने लगता है और कई लोग वर्षों जप करते रहते हैं, लेकिन उन्हें इसका अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होता।
नई दिल्ली। मंत्र जप अनेक लोगों की दिनचर्या का हिस्सा होता है। केवल हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि अन्य धर्मों में भी अपने-अपने धर्मग्रंथों के अनुसार जप का प्रभाव बताया गया है। इसीलिए अधिकांश लोग काम्य जप करते हैं। काम्य यानी किसी न किसी कामना, उद्देश्य की पूर्ति के लिए जप करते हैं। लेकिन हम देखते हैं कि कई लोगों के मंत्र जप का तुरंत प्रभाव होने लगता है और कई लोग वर्षों जप करते रहते हैं, लेकिन उन्हें इसका अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होता। मंत्र जप सफल नहीं होने के अनेक कारण होते हैं।

मंत्र वस्तुतः शब्दों, वर्णों, मात्राओं का एक समुच्चय होता है जिनके उच्चारण, आवरण, आवृत्ति का एक विशेष क्रम होता है। प्रत्येक वर्ण या अक्षर का एक प्रतिनिधि देवता होते है जो उस अक्षर में अपना प्रभाव डालता है और जब अनेक वर्ण जुड़ते हैं तो वह मंत्र बन जाता है। ऐसा नहीं है कि मंत्र केवल वही होते हैं जो शास्त्रों में लिखे होते हैं। हम दिनभर में जो भी बोलते हैं वह मंत्रमय ही होता है। जिसका कहीं न कहीं जाकर प्रभाव होता है और हमारे द्वारा उच्चारित ध्वनि ब्रह्मांड में निरंतर प्रवाहित होती रहती है। अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिक भी यह साबित कर चुके हैं कि किसी व्यक्ति द्वारा कहे गए शब्द कभी नष्ट नहीं होते।
मंत्रों के अनुसार शुभ-अशुभ फल मिलते हैं
यही सिद्धांत मंत्रों का भी होता है। हम जो भी मंत्र बोलते हैं वे उसके प्रतिनिधि देवता तक पहुंचते हैं और हमें उनके अनुसार शुभ-अशुभ फल प्रदान करते हैं। इसीलिए मंत्र जप से पहले कुछ नियमों का पालन करना, कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है अन्यथा मंत्र अपना प्रभाव नहीं दिखा पाते।
आइये जानें कुछ बातें जिनका ध्यान रखकर आप भी मंत्र को अपने अनुकूल परिणाम देने वाला बना सकते हैं:

मंत्र जप का समय
शास्त्रों के अनुसार समस्त मंत्रों का जप समय प्रातः सूर्योदय के समय या उससे पहले करना अत्यंत प्रभावी होता है। लेकिन षटकर्म के अनुसार मंत्रों के कुछ समय निश्चित किए गए हैं। उनके अनुसार वशीकरण दिन के पूर्व भाग में, विद्वेषण तथा उच्चाटन दिन के मध्य भाग में, शांति और पुष्टिकर्म दिन के अंतिम भाग में तथा मारण कर्म संध्याकाल में किया जाना चाहिए। काम्य जप यानी जीवन में सुख-समृद्धि, उन्नति, तरक्की के लिए ग्रहों के मंत्र जप या गुरु से प्राप्त मंत्र का जप सूर्योदय के समय किया जाए तो जल्दी फलीभूत होता है।

नित्य पूजा
यदि व्यक्ति ने किसी मंत्र जप का संकल्प ले रखा है तो उसे मंत्र जप के साथ अपनी नित्य पूजा करना आवश्यक है। इसके लिए शास्त्रों में कहा गया है-
एकदा वा भवेत्पूजा न जपेत् पूजनं विना।
जपान्ते वा भवेत्पूजा पूजान्ते वा जपेन्मनुम्।।
यानी जप या अनुष्ठान के समय भी प्रतिदिन एक बार अपने ईष्टदेव या देवताओं का पूजन करना आवश्यक है। बिना पूजन के जन करना निषिद्ध है। यह पूजन जपकाल के प्रारंभ या जप समाप्त होने के बाद किया जाता सकता है।

जपकाल में ये न करें
मंत्र जपकाल के दौरान व्यक्ति को आलस्य, जम्हाई, निद्रा, छींक, थूक, भय, गुप्तांग स्पर्श, क्रोध करना, पैर फैलाना, मंत्र जप के बीच-बीच में दूसरों से बात करना, इधर-उधर देखना निषिद्ध बताया गया है। ऐसा करने से मंत्र का विपरीत प्रभाव मिलने लगता है।

मंत्र की गणना
मंत्र की संख्या गिनने के लिए प्रत्येक कर्म के अनुसार माला होना चाहिए। हाथ की अंगुलियों के पर्व, अक्षत, पुष्प, चंदन या मिट्टी से जप संख्या की गणना नहीं करना चाहिए। काली तंत्र के अनुसार जप में मणिमाला का प्रयोग किया जाना चाहिए। मणिमाला कई पदार्थों की बनी हुई होती है जैसे रत्न, रूद्राक्ष, तुलसी, शंख,कमलगट्टा, चंदन, कुशमूल, स्फटिक, मोती आदि। काली तंत्र के अनुसार शंखमाला से सौ गुना फल मिलता है। मूंगे से सहस्त्र, स्फटिक से दस सहस्त्र, मुक्तक से लाख, कमल बीजों की माला से दस लाख, कुशा मूल की माला से सौ करोड़ तथा रूद्राक्ष से मंत्र जप का अनंत कोटि फल मिलता है।

कब से प्रारंभ करें
शुभ कार्य का प्रारंभ यदि शुभ समय में किया जाए तो जल्दी परिणाम मिलता है। मंत्र जप प्रारंभ करने के लिए गुरु पुष्य या रवि पुष्य नक्षत्र सर्वश्रेष्ठ कहा गया है।
महीनों के अनुसार देखा जाए तो चैत्र, बैशाख, श्रावण, भाद्रपद, माघ, फाल्गुन ये छह महीने मंत्र जप में तुरंत सिद्धिदायक कहे गए हैं। इनके अलावा जिस ग्रह का मंत्र जप किया जा रहा है उसी के निश्चित दिन-वार में मंत्र जप प्रारंभ किया जा सकता है।












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