Lunar Eclipse June 2020: जून में लगेंगे ये दो ग्रहण, जानें सही समय और क्या होगा इसका प्रभाव
Lunar Eclipse june 2020: जून में लगेंगे ये दो ग्रहण, जानें सही समय और क्या होगा इसका प्रभाव
नई दिल्ली। साल 2020 के जून महीने में दो ग्रहण लगने वाले हैं। जून में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों ही लगेगा। आपको बता दें कि 5 जून 2020 को चंद्र ग्रहण लगेगा, जबकि महीने के अंत में 21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण लगेगा। वर्ष 2020 लगने वाला दूसरा चंद्रग्रहण 5 जून से 6 जून के बीच लगेगा। यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा जो भारत में दिखाई देगा। यह इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा। समय और तिथि के अनुसार, यह चंद्रग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा।

यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा
यह इस साल आने वाले चार चंद्र ग्रहणों में से दूसरा होगा और ये सभी पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण यानी उपच्छाया चंद्र ग्रहण होंगे।जो भारत में दिखाई देगा। यह इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा। याद दिला दें कि इस साल का पहला चंद्र ग्रहण जनवरी में हुआ था। इस पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण को 'स्ट्राबेरी मून एक्लिप्स' कहा जाता है। परंपरागत रूप से, जून पूर्णिमा को स्ट्राबेरी मून कहा जाता है, इसलिए, आगामी पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण को कई लोगों द्वारा स्ट्राबेरी मून एक्लिप्स भी कहा जा रहा हैं। बता दें 2020 में हमें कुल चार पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण देखने को मिलेंगे, जिनमें से पहला 10 जनवरी से 11 जनवरी के बीच हुआ था।

क्या होता है उपच्छाया चंद्र ग्रहण?
उपच्छाया चंद्र ग्रहण उस स्थिति में लगता है जब पृथ्वी की वास्तविक छाया में न आकर उसकी उपच्छाया से ही वापस लौट जाता है। इस स्थिति में चांद पर एक धुंधली सी परत नजर आती है। इस घटना में चांद के आकार पर भी कोई असर नहीं पड़ता है, जबकि वास्तविक चंद्र ग्रहण में चंद्रमा के आकार में फर्क पड़ता है। इस घटना को नग्न आंखों के द्वारा नहीं देखा जा सकता है। उपच्छाया चंद्र ग्रहण बहुत अधिक प्रभावशाली नहीं होता है। इस दौरान सूतक काल भी मान्य नहीं होता है।

5 जून को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का समय
ग्रहण 5 जून को पूर्वाह्न 11:15 बजे से शुरू होगा और 6 जून को अपराह्न 2:34 बजे तक चलेगा। ग्रहण का पूर्ण चरण 6 जून को 12:54 पूर्वाह्न पर दिखाई देगा। इस पेनमुब्रल चंद्र ग्रहण की कुल अवधि तीन घंटे और 18 मिनट है।

चंद्रमा को देखना इसलिए थोड़ा मुश्किल होगा
ऐसा कहा जाता है कि आगामी ‘स्ट्राबेरी मून एक्लिप्स' के दौरान चंद्रमा का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा Earth's penumbra में जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रमा को देखना लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल होगा क्योंकि यह एक प्रथमाक्षर होगा, क्योंकि यह एक चंद्रग्रहण है। स्काई और टेलीस्कोप की एक रिपोर्ट के अनुसार, पृथ्वी के पेनम्ब्रा का बाहरी हिस्सा बहुत पीला है, जिसके कारण अधिकांश लोग तब तक कुछ भी नोटिस नहीं कर पाएंगे, जब तक चंद्रमा की धार कम से कम आधे रास्ते में नहीं खिसक जाए। 2020 के अन्य दो पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण 4 जुलाई से 5 जुलाई तक और 29 नवंबर से 30 नवंबर तक होंगे।

जानें कब होता हैं चंद्रग्रहण
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है, इस प्रकार चंद्रमा पर छाया पड़ती है। चंद्र ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। कुल चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और प्रथमाक्षर चंद्र ग्रहण। एक चन्द्रग्रहण के दौरान, चंद्रमा पृथ्वी की छाया के बाहरी भाग से होकर गुजरता है, इस प्रकार यह बहुत ही धूमिल हो जाता है। दूसरी भाषा में चंद्रग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में अवस्थित हों। उपच्छाया चंद्रग्रहण की बात की जाए तो यह तब लगता है जब पृथ्वी की परिक्रमा करने के दौरान चंद्रमा पेनुम्ब्रा से हो कर गुजरता है। पेनुम्ब्रा धरती की परछाई के हल्के से भाग को बोला जाता है।

21 जून को लगेगा सूर्य ग्रहण
महीने के अंत में 21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण लगेगा। भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है. पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। कभी-कभी चाँद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

भारत में सूर्य ग्रहण का समय
भारत में ये सूर्य ग्रहण 10.20 AM पर शुरु होगा। परमग्रास सूर्य ग्रहण का समय 12:02 PM हैं । ग्रहण समाप्ति समया 01: 49 PM हैं और इस सूर्य ग्रहण की खण्डग्रास की अवधि - 5 घंटे, 48 मिनट 3 सेकंड बताई गई हैं।

इन जगहों पर दिखाई देगा सूर्य ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण भारत, नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूऐई, एथोपिया तथा कोंगों में दिखाई देगा। देहरादून, सिरसा तथा टिहरी कुछ प्रसिद्ध शहर हैं जहाँ पर वलयाकार सूर्यग्रहण दिखाई देगा. नई दिल्ली, चंडीगढ़, मुम्बई, कोलकाता, हैदराबाद, बंगलौर, लखनऊ, चेन्नई, शिमला, रियाद, अबू धाबी, कराची, बैंकाक तथा काठमांडू आदि कुछ प्रसिद्ध शहर हैं जहाँ से आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा. यह सूर्य ग्रहण उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के देशों और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के अधिकांश हिस्सों से दिखाई नहीं देगा. इनके अतिरिक्त यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, जर्मनी, स्पेन और कुछ अन्य यूरोपीय महाद्वीप के देशों से सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
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