Kundali: कुंडली का चतुर्थ भाव देता है उत्तम वाहन सुख की जानकारी
नई दिल्ली, 07 जून। अपना अच्छा घर और महंगी गाड़ियों का सपना सभी देखते हैं लेकिन कुछ ही लोगों का यह सपना पूरा हो पाता है। जन्मकुंडली का चतुर्थ भाव सुख स्थान होता है और इससे वाहन, मकान, भूमि सहित अनेक प्रकार की भौतिक संपदाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यदि चतुर्थ भाव में शुभ राशि में शुभ ग्रह हों या अपने स्वामी से युत या दृष्ट हो और चतुर्थेश भी शुभ प्रभाव में हो तो शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

उत्तम वाहन सुख के लिए चतुर्थ भाव में शुभ ग्रहों का होना अत्यंत आवश्यक है। आइए जानते हैं जन्म कुंडली के वे समस्त योग जो वाहन सुख प्रदान करने के उत्तरदायी होते हैं।
- सबसे पहली बात तो यह कि वाहन सुख का कारक ग्रह शुक्र होता है। कुंडली में चतुर्थ भाव, चतुर्थेश एवं शुक्र की अच्छी स्थिति होने पर उत्तम वाहन सुख की प्राप्ति होती है। चतुर्थ भाव का कारक ग्रह चंद्र एवं बुध है। यदि इनकी भी स्थिति कुंडली में अच्छी है तो शुभ फल में वृद्धि हो जाती है।
- द्वितीयेश लग्न में हो दशमेश धन भाव में हो और चतुर्थ भाव में उच्च राशि का ग्रह हो तो उत्तम वाहन सुख मिलता है।
- लग्नेश, चतुर्थेश तथा नवमेश के परस्पर केंद्र में रहने से वाहन सुख मिलता है।
- लग्नेश तथा चतुर्थेश एक साथ लग्न, चतुर्थ या नवम भाव में हो तो इन्हीं ग्रहों की दशा या अंतर्दशा में वाहन की प्राप्ति होती है।
- शुक्र से सप्तम चंद्रमा होने पर भी वाहन सुख मिलता है।
- चतुर्थेश केंद्र में हो और केंद्र का स्वामी का स्वामी लग्न में हो तो बड़े वाहन का योग बनता है।
- दशमेश लाभ भाव में हो तथा लाभेश दशम भाव में हो तो भी वाहन सुख की प्राप्ति होती है।
- गुरु शुक्र चंद्र तथा चतुर्थेश साथ होकर केंद्र या त्रिकोण में हो तो उत्तम वाहन योग होता है। जातक कई वाहनों का स्वामी बनता है।
- नवमेश, दशमेश, लाभेश तीनों चतुर्थ भाव में हो तो वाहन योग बनता है।
- चतुर्थेश, शनि, गुरु व शुक्र के साथ नवम भाव में हो तथा नवमेश किसी केंद्र या त्रिकोण में हो तो बहुवाहन योग होता है।












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