छत्र योग है आपकी कुंडली में तो राज करने से कोई नहीं रोक सकेगा

नई दिल्ली। कभी न कभी आपने यह जरूर सोचा होगा कि कोई व्यक्ति अत्यंत साधारण परिवार में जन्म लेने के बाद भी उच्चता का शिखर छू लेता है और कोई व्यक्ति धनवान, सर्वसंपन्न् परिवार में जन्म लेने के बाद भी लगातार पतन की ओर बढ़ता रहता है। ऐसा क्यों होता है? वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह सब जन्मकुंडली में मौजूद शुभ-अशुभ योगों के कारण होता है। ज्योतिष में ऐसे अनेक शुभ और दुर्लभ योगों के बारे में बताया गया है जो यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मौजूद है तो व्यक्ति को दुनिया पर राज करने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसे शुभ योगों में से एक है छत्र योग।

कब बनता है छत्र योग

कब बनता है छत्र योग

यह एक विशेष शुभ योग है। किसी जातक की जन्मकुंडली में जब चतुर्थ भाव से दशम भाव तक या इनके बीच सभी ग्रह मौजूद हों तो छत्र योग बनता है। वैदिक ज्योतिष में वर्णित शुभ योगों में इसे दुर्लभ शुभ योग की श्रेणी में रखा गया है। यह योग बहुत कम कुंडली में देखने को मिलता है और जिसकी कुंडली में हो उस व्यक्ति को राजा के समान जीवन प्रदान करता है।

छत्र योग के लाभ

छत्र योग के लाभ

वैदिक ज्योतिष के अनुसार छत्र योग वाले व्यक्ति पर प्रभु की पूर्ण कृपा होती है। जिस जातक की कुंडली में छत्र योग होता है वह अपने जीवन में लगातार प्रगति करता रहता है। उसे कभी किसी भी मामले में पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं होती। ऐसा व्यक्ति यदि राजनीति में है तो देश के शीर्षस्थ पद तक पहुंच सकता है। यदि किसी सरकारी नौकरी में है तो भी देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने से इसे कोई नहीं रोक सकता। धन, संपत्ति, भौतिक सुख-सुविधाएं, भोग विलास के साधन, नौकर-चाकर इसके लिए सर्वत्र तैयार रहते हैं। ऐसा व्यक्ति समाज का प्रतिष्ठित इंसान होता है।

आंशिक छत्र योग

आंशिक छत्र योग

कभी-कभी किसी जन्मकुंडली में आंशिक छत्र योग भी होता है। यानी चतुर्थ से दशम स्थान के बीच में 8 ग्रह तो होते हैं, लेकिन कोई एक ग्रह बाहर निकल जाता है। यदि बाहर निकलने वाला ग्रह राहु, केतु, मंगल या शनि में से कोई एक है तो छत्र योग का शुभ प्रभाव बना रहता है। लेकिन यदि सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु, शुक्र में से कोई एक बाहर निकल जाता है तो इससे आंशिक छत्र योग बनता है। इस स्थिति में जातक के दोनों ही तरह के अच्छे-बुरे परिणाम मिलते हैं। जातक उच्च पद तक पहुंचता तो है, लेकिन उससे पहले उसे काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है।

सूर्य और बृहस्पति की उपासना से मजबूत होता है योग

सूर्य और बृहस्पति की उपासना से मजबूत होता है योग

जिस जातक की कुंडली में आंशिक छत्र योग है उसे सूर्य और बृहस्पति की नियमित उपासना करना चाहिए। इससे योग को बल मिलता है। सूर्य के लिए आदित्यहृदय स्तोत्र का नियमित पाठ और बृहस्पति की मजबूती के लिए प्रत्येक गुरुवार को केले का दान किया जाता है।

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