Chandra Grahan 2025: चंद्र ग्रहण आज, इतने बजे से लगेगा सूतक काल, नोट करें Time
Chandra Grahan 2025 : आज साल 2025 का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, ये ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 9 बजकर 58 मिनट पर शुरू होकर देर रात 1 बजकर 26 मिनट तक रहेगा और भारत में दिखाई देगा इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य है। आपको बता दें कि चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है इसलिए भारत में ये रविवार दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से प्रारंभ हो जाएगा यानी कि इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ काम नहीं होंगे इसलिए मंदिरों के कपाट भी बंद रहेंगे।

कहां-कहां दिखेगा Chandra Grahan 2025?
आज का ग्रहण भारत, , ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, हिंद महासागर, पश्चिमी प्रशांत महासागर, पूर्वी अटलांटिक महासागर और अंटार्कटिका में दिखेगा। बेंगलुरु के जवाहरलाल नेहरू तारामंडल ने पुष्टि की है कि यह पूर्ण चंद्रग्रहण बेंगलुरु सहित पूरे भारत में दिखाई देगा, बशर्ते आसमान साफ रहे। यह दुर्लभ खगोलीय घटना 82 मिनट तक पूर्ण चंद्रग्रहण के रूप में रहेगी, जिसके दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया से गुजरते हुए गहरे लाल रंग में बदल जाएगा।
क्या है 'ब्लडमून'?
ये ग्रहण पूर्ण है इसलिए इसे 'ब्लडमून' भी कहा जा रहा है। लाल रंग का मतलब यहां पर चांद के लाल होने से नहीं है बल्कि इसका अर्थ लाल-नारंगी प्रकाश से है। जब पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की रोशनी को मोड़ देता है तब लाल रंग की किरणें पृथ्वी की सतह से होकर गुजरकर चंद्रमा तक पहुंचती हैं। जिससे उस समय चंद्रमा पर लालिमा छा जाती है जिसे कि 'ब्लडमून' कहते हैं।
कब होता है 'पूर्ण चंद्र ग्रहण' (Total lunar eclipse)
आपको बता दें कि जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में होते हैं तो 'पूर्ण चंद्र ग्रहण' लगता है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को राहु और केतु की छाया से जोड़कर देखा जाता है। ये माना जाता है कि चंद्र ग्रहण का असर व्यक्ति के मानसिक, पारिवारिक और आर्थिक जीवन पर भी पड़ सकता है इसलिए ग्रहणकाल में सभी को ध्यान करने को कहा जाता है और ग्रहण काल के बाद स्नान- दान करने को बोला जाता है, जिससे निगेटिव चीजें दूर हों।
Chandra Grahan के दौरान करें इन मंत्रों का जाप
गायत्री मंत्र का करें जाप
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।' ये हर मर्ज की काट है इसलिए ग्रहणकाल में इसे कम से कम कम 5-10 बार जरूर करना चाहिए।
हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए
- 'ॐ हं हनुमते नमः का जाप ( 108 बार)
- 'ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा' ( 51 बार)
- 'ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्।' ( 111 बार)
Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार की राय जरूर लें।












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