धनतेरस पर पूजन एवं खरीददारी के शुभ मुहूर्त
[पं अनुज के शुक्ल] धनतेरस दीपों का प्रारमिभक त्यौहार है। निर्णय-सिन्धु व स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि कार्तिक मास की त्रयोदशी को सांयकाल के समय घर में मुख्य द्वार पर दीपक जलाना चाहिए। इससे अकाल-मृत्यु दोष नष्ट होता है। धनतेरस के दिन द्वार पर व नापदान पर तेल का दीपक जलाने की प्रथा प्रचलित है। वर्षा ऋतु में एकति्रत कीटाणुओं को नष्ट करने में दीपक की अहम भूमिका सिद्ध होती है। चूकि तेल के जलने से धूल में लिप्त कीटाणुओं का विनाश हो जाता है।
त्रयोदशी के दिन स्वास्थ्य के देवता धनवंतरि का जन्मोत्सव मनाया जाता है। कहा गया है कि पहला सुख जब सुन्दर काया अर्थात स्वस्थ्य शरीर ही आपका खजाना है। धन, दौलत, मकान, वाहन, कैरियर आदि बनाना आसान है, किन्तु आज की फास्ट-फूड पर आधारित जीवनशैली में शरीर को स्वस्थ्य रख पाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
शरद ऋतु का मौसम हमारे शरीर के लिए अनुकूल होता है, इस मौसम में पाचन शकित काफी मजबूत हो जाती है और हम जो भी खादय रूप में ग्रहण करते है, वह अच्छी तरह से हजम हो जाता है। ठंडक के मौसम की अधिकतर सबिजया स्वास्थ्य वर्धक और स्वाद युक्त होती है। अत: हम-सभी धनवंतरि देव के जन्मोत्सव पर स्वास्थ्य का बैंक बैलेंस बढ़ा कर पूरे वर्ष रोग की किस्त अदा करने का सकंल्प लें।
खरीददारी करने का शुभ मुहूर्त- इस वर्ष धन तेरस 01 नवम्बर दिन शुक्रवार 2013 को राति्र 9:33 मि0 तक है।
चौघडि़या मूहूर्त- सुबह 6:15 मि0 से सुबह 10:33 मि0 तक चर लाभ अमृत तथा 11:59 मि0 से अपरान्ह 01:23 मि0 तक शुभ एंव सांय 04:17 मि0 से 05:43 मि0 तक।
नया व्यवसाय शुरू करने के लिए: सुबह 10:33 मि0 से सांय 05:43 मि0 तक रहेगा।
प्रसाद- उपरोक्त उपाय को श्रद्धा पूर्वक करने से लाभ अवश्य होगा। धनवंतरि देव को अर्पित प्रसाद स्वंय जरूर ग्रहण करें।
स्लाइडर में देखें राशियों के मुताबिक करें धनवंतरि देव का पूजन और पायें रोग से छुटकारा।

आगे पढ़ें कैसे करें पूजन
त्रयोदशी के दिन स्वास्थ्य के देवता धनवंतरि का जन्मोत्सव मनाया जाता है। कहा गया है कि पहला सुख जब सुन्दर काया अर्थात स्वस्थ्य शरीर ही आपका खजाना है। इस मौके पर आगे पढ़ें राशियों के अनुसार कैसे करनी है पूजा।

मेष
मेष- इस राशि के लोग धनवंतरि देव का चित्र रख कर विधिवत पूजन करें एंव गुड़ एंव छुआरे का भोग लगायें।

वृष
वृष- खीर में इलायची व केसर डालकर धनवंतरि देव का पूजन करने का भोग लगाकर रोग नष्ट होगा और धन-धान्य से आप परिपूर्ण होंगे।

मिथुन
मिथुन- सौंफ, गोरोचन व शहद से धनवंतरि देव का पूजन करने का भोग लगाकर रोग का शमन होगा।

कर्क
कर्क- सफेद सुहागा, मिश्री और घी से धनवंतरि देव का पूजन करने का भोग लगाकर रोग समाप्त होगा।

सिंह
सिंह- गुलाब जल, गुड़ व बादाम से धनवंतरि देव का पूजन करने का भोग लगाकर रोग का नाश होगा।

कन्या
कन्या- पिपली, शहद एंव मिश्री से धनवंतरि देव का पूजन करने का भोग लगाकर रोग नष्ट होगा।

तुला
तुला- र्इसबगोल की भूसी, शहद व दही का भोग लगाकर धनवंतरि देव का पूजन करने से रोग खत्म होंगे।

वृशिचक
वृशिचक- लाल चन्दन, गुलाब फूल, गुड़ व बादाम का भोग लगाकर धनवंतरि देव का पूजन करने से रोग का नाश होगा।

धनु
धनु- दूध, हल्दी, पीले फूल व गोंद का भोग लगाकर धनवंतरि देव का पूजन करने से रोग का शमन होगा।

मकर
मकर- तिल, गोंद व शिलाजीत का भोग लगाकर धनवंतरि देव का पूजन करने से रोग नष्ट होंगे।

कुम्भ
कुम्भ- लौंग, लौह भस्म, व तिल का भोग लगाकर धनवंतरि देव का पूजन करने से रोग समाप्त होगा।

मीन
मीन- केसर, चिरौंजी, मिश्री, व शहद का भोग लगाकर धनवंतरि देव का पूजन करने से रोग समाप्त होंगे।












Click it and Unblock the Notifications