अमीरों, किसानों के लिए कष्टकारी होगा 10 दिसंबर का पूर्ण चंद्र ग्रहण

10 दिसम्बर 2011, दिन शनिवार, मार्गशीर्ष मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा में खग्रास पूर्ण चंद्रग्रहण पड़ेगा। यह चन्द्रग्रहण उत्तर अमेरिका महाद्वीप के पूर्वी इलाके में स्पष्ट दिखाई देगा, जबकि शेष भू-भाग में प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलिया, हिन्द महासागर, एशिया महाद्वीप, यूरोप पूर्वी अफ्रीका महाद्वीप में आंशिक रूप से दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण सर्वत्र दिखाई पड़ेगा।
चंद्र ग्रहण का समय:
सूतक- 10 दिसम्बर को प्रातः 9:16 बजे से सूतक प्रारम्भ हो जायेगा।
स्पर्श: सांय 6 बजकर 15 मिनट व 18 सेकेंड पर।
सम्मीलन: रात्रि 7 बजकर 35 मिनट व 37 सेकेंड।
मध्य: रात्रि 8 बजकर 01 मिनट व 44 सेकेंड।
उन्मीलन: रात्रि 8 बजकर 27 मिनट व 53 सेकेंड।
ग्रहण का मोक्ष: रात्रि 9 बजकर 48 मिनट व 12 सेकेंड।
ग्रहण काल में क्या न करें- चन्द्रमा या सूर्यग्रहण के काल में कैंची का प्रयोग न करें, फूलों को न तोड़े, बालों व कपड़ों को साफ न करें, दातुन या ब्रश न करें, गाय, भैंस व बकरी का दोहन न करें, भोजन न करें, कठोर शब्दों का प्रयोग न करें, सहवास न करें, यात्रा न करें तथा शयन करना भी वर्जित माना गया है।
ग्रहण का वार फल- यह ग्रहण शनिवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए राज्य के मंत्रियों, सचिवों को भारी कष्ट सहना पड़ेगा। सभी प्रकार की काली व पीली वस्तुयें मॅहगी हो सकती हैं।
ग्रहण का नक्षत्र फल- यह चन्द्रग्रहण रोहिणी व मृगशिरा दो नक्षत्रों में पड़ेगा। रोहिणी नक्षत्र में ग्रहण लगभग 15 मि0 तक रहेगा तथा शेष ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र में पड़ेगा। अतः व्यापारी वर्ग, शासक वर्ग, धनवान व्यक्ति एंव किसानों को कष्ट रहेगा।
भारत में कहां पड़ेगा ज्यादा प्रभाव- पंजाब, अलवर, मथुरा, दिल्ली, गढ़वाल, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा इलाहाबाद पर इस ग्रहण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
गर्भवती महिलाओं के लिए- ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं एक नारियल अपने पास रखें, जिससे कि वायुमण्डल से निकलने वाली नकारात्मक उर्जा का प्रभाव उन पर नहीं पड़ेगा। गर्भवती महिलाएं कैंची, चाकू, या किसी भी धारदार वस्तु का प्रयोग मत करें। साथ ही वे सभी काम नहीं करें, ऊपर जिन कार्यों को नहीं करने के लिए कहा गया है, वे नहीं करें। साथ ही ग्रहण के दौरान ईश्वर के भजन करें।












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