Punjab Politics: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में जारी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली हाईकमान की ओर से सुलह की कोशिशें तेज हो रही हैं। राज्य में पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल पिछले तीन दिनों से डेरा जमाए हुए हैं और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं।
कई राउंड कि कोशिशों के बाद आज 11 जुलाई को चन्नी मुलाकात के लिए तैयार हो गए हैं। यह बैठक चंडीगढ़ में विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर होगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि भूपेश बघेल पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों और नेताओं के बीच जारी धमासान को सुलझानें में कामयाब हो जाएंगे।
बता दें कि पंजाब कांग्रेस में पार्टी प्रमुख को लेकर चन्नी और वड़िंग के बीच की लड़ाई अब साफ तौर पर राजनीतिक गलियारों में आ गई है। शनिवार की यह बैठक पंजाब संगठन के लिए काफी महत्तवपूर्ण हो गया है। चरणजीत सिंह चन्नी ने मीडिया से कहा कि चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाए रखने और नेताओं के बीच बातचीत को जारी रखने के लिए उन्होंने भूपेश बघेल के साथ मीटिंग के लिए हामी भरी है । उनका कहना है कि सभी अपनी बात रखेंगे ताकि सारी गलतफहमियां दूर हो सकें। इस बैठक में केवल तीन सीनिर लीडर-चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और राणा गुरजीत सिंह शामिल होंगे। माना जा रहा है कि यह बातचीत पंजाब चुनाव में कांग्रेस की स्थिति और डैमेज कंट्रोल करने के लिहाज से सही साबित होगी। बता दें कि, इससे पहले भी 10 जुलाई को दोनों नेताओं के बीच बैठक प्रस्तावित थी जिसे अचानक टाल दिया गया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, चन्नी गुट की ओर से दो प्रमुख शर्तें रखी गई थीं। पहली-बैठक कांग्रेस भवन में न हो और दूसरी पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग बैठक में मौजूद न रहें। हालांकि कांग्रेस की ओर से इन दोनों शर्तों पर सहमति नहीं बन सकी,जिसके कारण मीटिंग कैंसिल करनी पड़ी। इसके बाद पार्टी की ओर से मैसेज दिया गया कि संगठन किसी नेता के शर्तों पर अपने फैसले नहीं लेगा। मीटिंग से पहले पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने मीडिया से कहा था कि चन्नी ने उनसे मिलने के लिए समय नहीं मांगा। तब चन्नी ने कहा था कि वह तीन दिन के लिए पंजाब से बाहर हैं। गौरतलब है कि पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में अब कुछ ही महीनें बचे हैं और पार्टी के भीतर इस तरह के टकराव का चुनावी समय में व्यापक असर पड़ सकता है। इसिलिए चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। ये कोई पहली बार नहीं है इससे पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में सिद्धु बनाम कैप्टन अमरिंदर सिंह की लंबी लड़ाई का खामियाजा कांग्रेस भुगत चुकी है। 2026 में फिर एक बार ऐसी ही स्थिति बनती जा रही है। कांग्रेस को डर है कि कहीं इन दोनों नेताओं की लड़ाई से पार्टी अपनी बची जमीन भी न खत्म कर दे। इसी वजह से भूपेश बघेल की यह बैठक केवल एक मुलाकात के तौर पर नहीं देखी जा रही। कांग्रेस इसके जरिए पंजाब में चल रहे मतभेदों को कम कर संगठन को एकजुट किया जा सके। अब सभी की नजर 11 जुलाई को होने वाली इस बैठक पर है।'पार्टी के लिए होगी बैठक', मीटिंग से पहले चन्नी ने कांग्रेस को दे दिया अलटिमेटम
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इससे पहले टल गई थी चन्नी-बघेल की बैठक
पंजाब कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह बैठक?
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