TN Govt Formation: तमिलनाडु में सरकार गठन का ‘नंबर गेम’ उलझा! विजय को कौन देगा बहुमत, किसने खींचे हाथ?
TN Govt Formation Vijay TVK Majority: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां सत्ता की चाबी किसी एक के पास नहीं है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर तो उभरी है, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर होने के कारण सरकार बनाने की राह कांटों भरी हो गई है।
लेकिन बहुमत के आंकड़े से अब भी दूरी ने पूरे घटनाक्रम को बेहद दिलचस्प और जटिल बना दिया है।

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर और विजय के बीच लगातार तीन दिनों में तीन मुलाकातें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक सरकार गठन का रास्ता साफ नहीं हो पाया है। राजभवन स्पष्ट संकेत दे चुका है कि केवल दावों के आधार पर सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं दिया जाएगा, बल्कि 118 विधायकों के समर्थन का ठोस और लिखित प्रमाण जरूरी होगा।
TVK Struggles Majority Mark; सबसे बड़ी पार्टी बनी TVK, लेकिन आंकड़ों का मायाजाल में फंसी
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। हालांकि विजय दो सीटों से चुनाव जीते हैं और उन्हें एक सीट छोड़नी होगी, ऐसे में पार्टी की प्रभावी संख्या 107 रह जाती है। बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। यानी विजय को सरकार बनाने के लिए कम से कम 11 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। यही वजह है कि पिछले तीन दिनों से चेन्नई में लगातार बैठकों, बातचीत और समर्थन जुटाने का दौर जारी है।
कांग्रेस ने DMK से दूरी बनाकर विजय का हाथ थामा
सरकार गठन की दौड़ में सबसे पहला बड़ा समर्थन कांग्रेस की ओर से आया। कांग्रेस ने DMK गठबंधन से अलग होकर विजय को समर्थन देने का फैसला किया। पार्टी के पांच विधायक TVK के साथ खड़े नजर आए। हालांकि कांग्रेस का यह समर्थन बिना शर्त नहीं था। पार्टी ने साफ कहा कि TVK को सांप्रदायिक ताकतों यानी BJP और NDA से दूरी बनाए रखनी होगी।
तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई ने यह भी खुलासा किया कि TVK ने कांग्रेस को दो मंत्री पद और एक राज्यसभा सीट का प्रस्ताव दिया है। कांग्रेस चाहती है कि यह गठबंधन भविष्य के लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों तक जारी रहे।लेकिन कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिलने के बावजूद विजय बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सके।
वामपंथी दलों ने दिया सहारा
राजनीतिक अनिश्चितता के बीच CPI और CPI(M) ने भी विजय को समर्थन देने का फैसला किया। CPI ने कहा कि वह स्थिर, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक सरकार के लिए TVK का समर्थन कर रही है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह सरकार में शामिल नहीं होगी, बल्कि बाहर से समर्थन देगी। वहीं CPI(M) ने भी विजय के समर्थन की घोषणा की।
पार्टी नेता पी. शन्मुगम ने कहा कि अगर यह राजनीतिक गतिरोध लंबा चला तो BJP पिछले दरवाजे से तमिलनाडु की राजनीति में प्रभाव बढ़ा सकती है। इसलिए राज्य में जल्द स्थिर सरकार बनना जरूरी है। दोनों वाम दलों के पास दो-दो विधायक हैं। इनके समर्थन से विजय का आंकड़ा जरूर बढ़ा, लेकिन तस्वीर अब भी पूरी तरह साफ नहीं हुई।
VCK बना सबसे बड़ा 'किंगमेकर'
पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) को लेकर हो रही है। पार्टी के दो विधायक हैं और यही दो सीटें सरकार गठन की दिशा तय कर सकती हैं। शुरुआत में खबरें आईं कि VCK विजय को समर्थन देने जा रही है। पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट से समर्थन का दावा करने वाला पोस्ट भी सामने आया, लेकिन कुछ ही देर बाद पोस्ट डिलीट हो गया और अकाउंट भी सस्पेंड हो गया।
इस बीच VCK के उप महासचिव वन्नी अरसु ने खुलकर डिप्टी सीएम पद और कैबिनेट में हिस्सेदारी की मांग कर दी। वहीं पार्टी प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं की है। यही असमंजस सरकार गठन में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।

IUML ने पहले संकेत दिए, फिर पीछे हट गई
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने भी पहले ऐसा संकेत दिया जिससे लगा कि वह विजय को समर्थन दे सकती है। कुछ वाम नेताओं ने दावा किया कि IUML ने समर्थन पत्र भी भेज दिया है। लेकिन बाद में पार्टी नेता एएम शाहजहां ने साफ शब्दों में कहा कि IUML ने किसी को समर्थन नहीं दिया है और वह अब भी DMK गठबंधन के साथ है। उन्होंने कहा, हमने किसी को कोई समर्थन पत्र नहीं दिया। ये सारी अफवाहें हैं। इस बयान ने विजय के दावे को एक और झटका दे दिया।
AMMK ने विजय पर लगाया 'फर्जी समर्थन पत्र' फैलाने का आरोप
तमिल राजनीति में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने विजय समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए। दिनाकरन ने दावा किया कि TVK समर्थक उनकी पार्टी के समर्थन का फर्जी पत्र वायरल कर रहे हैं। उन्होंने इसे हॉर्स ट्रेडिंग और लोकतंत्र का मजाक बताया। AMMK के एकमात्र विधायक ने AIADMK-एनडीए गठबंधन के साथ बने रहने का फैसला किया है। दिनाकरन ने राज्यपाल को पत्र लिखकर एडप्पादी के. पलानीस्वामी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की मांग भी की।
DMK और AIADMK फिलहाल दूरी बनाए हुए
तमिलनाडु की दो पारंपरिक द्रविड़ पार्टियां DMK और AIADMK फिलहाल पूरे घटनाक्रम को दूरी से देख रही हैं। हालांकि राजनीतिक गलियारों में कुछ समय के लिए DMK और AIADMK के बीच संभावित समझौते की चर्चा जरूर चली, लेकिन दोनों दलों ने इसे अव्यावहारिक बताया। DMK के पास 59 सीटें हैं, जबकि AIADMK ने 47 सीटें जीती हैं। दोनों ही दल फिलहाल अपने-अपने गठबंधनों को बचाने और अगले राजनीतिक कदम का इंतजार कर रहे हैं।
TN Govt Formation पर राज्यपाल की भूमिका पर बढ़ी बहस
सरकार गठन में हो रही देरी के बीच राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर की भूमिका भी चर्चा में आ गई है। राजभवन का कहना है कि बिना लिखित समर्थन के किसी को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जा सकता। दूसरी ओर TVK और उसके समर्थक दलों का तर्क है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय को पहले मौका मिलना चाहिए और बहुमत का परीक्षण विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के जरिए होना चाहिए। यही वजह है कि तमिलनाडु में अब राजनीतिक लड़ाई के साथ-साथ संवैधानिक बहस भी तेज हो गई है।
क्या आज खत्म होगा सस्पेंस?
TVK नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि विजय जल्द मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। लेकिन राजभवन अब भी समर्थन के आधिकारिक दस्तावेजों का इंतजार कर रहा है। फिलहाल स्थिति में यह साफ है कि तमिलनाडु में सरकार गठन केवल संख्या का खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक रणनीति, गठबंधन की मजबूरी और संवैधानिक प्रक्रिया की बड़ी परीक्षा बन चुका है।














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