Tamil Nadu Govt Crisis: साथ कैसे आ सकते हैं DMK-AIADMK? क्या भूल गए ‘अम्मा’ का चीर हरण?
Tamil Nadu Govt Crisis: 4 मई 2026 को तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव के नतीजे आए लेकिन अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि राज्य में सरकार किसकी बनेगी? इस चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है। अभिनेता विजय की तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन बहुमत से दूर रह गई, जिस दिन से परिणाम सामने आए उस दिन ही कांग्रेस ने उसे समर्थन देने का ऐलान किया था।
लेकिन राज्यपाल ने बहुमत ना होने की बात कहकर अभी तक टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया है, जिसकी वजह से तमिलनाडु के गर्वनर राजेंद्र अर्लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए हैं।

दिग्गज नेता कपिल सिब्बल ने तो साफ लफ्जों में कहा है कि 'राज्यपाल भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं लेकिन इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर ने सबको हैरानी में डाल दिया है और वो खबर है कि धुर विरोधी डीएमके और एआईएडीएमके के साथ आने की, अगर ये सच हुआ तो फिर राज्य की सियासी तस्वीर का रूप-रंग एकदम से बदल जाएगा लेकिय क्या ये मुमकीन है?
'इतिहास हमेशा वर्तमान पर हावी होता है'
इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार और साउथ की राजनीति को समझने वाले प्रसेन्नजीत घोष ने वनइंडिया हिंदी से खास बात की, उन्होंने कहा कि 'फौरी तौर पर ये कह पाना बहुत मुश्किल है लेकिन सियासत के मंच पर कुछ भी असंभव नहीं है लेकिन इतिहास हमेशा वर्तमान पर हावी होता है और डीएमके के साथ एआईएडीएमके का साथ चलना तभी संभव है जब वो 'अम्मा' का चीर हरण भूल जाएं।'

25 मार्च 1989 को हुआ था जयललिता का चीरहरण
अब आप सोच रहे हैं कि यहां पर किस चीर हरण की बात हो रही है? तो आपको बता दें 'अम्मा' का चीर हरण? यानी कि जे जयललिता का चीरहरण। दरअसल 25 मार्च 1989 को तमिलनाडु विधानसभा में हुई एक घटना ने जयललिता (AIADMK) के राजनीतिक जीवन को एक निर्णायक मोड़ दिया था और उसके बाद ही वो अम्मा के रूप में लोकप्रिय हुई थी। जयललिता के साथ एक अभद्र व्यवहार हुआ था जिसे कि वो और उनकी पार्टी ने हमेशा 'चीर हरण' कहकर ही संबोधित किया है।
'नेताओं ने बजट भाषण ही फाड़ दिया गया'
दरअसल 25 मार्च 1989 को जब विपक्ष की नेता जयललिता ने विधानसभा में स्पीकर से कहा कि 'मुख्यमंत्री करूणानिधि के उकसाने पर पुलिस ने उनके फोन को टैप किया है इसलिए इस पर बहस होनी चाहिए।'
लेकिन उस दिन बजट पेश होना था इसलिए स्पीकर ने कहा कि 'इस मुद्दे पर बहस नहीं हो सकती है, जिस पर एआईडीएमके के नेता नाराज हो गए और नारेबाजी करने लगे थे। इसी बीच बहस और हंगामा इतना तीखा हो गया कि नेताओं ने बजट भाषण ही फाड़ दिया।'

जयललिता की साड़ी का पल्लू हुआ था तार-तार
हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को स्थगित कर दिया था लेकिन इसके बाद जैसे ही जयललिता सदन से बाहर निकलने के लिए तैयार हुईं, डीएमके के एक सदस्य ने उन्हें रोकने की कोशिश की और उस विधायक ने जयललिता की साड़ी का पल्लू खींचा जिससे उनकी साड़ी भी फट गई और वो वहीं गिर गईं।
1991 ने जबरदस्त जीत हासिल की और पहली बार मुख्यमंत्री बनीं
इसके बाद जयललिता आग बबूला होते हुए फटी साड़ी पहने सदन से बाहर आईं और कसम खाई कि वो वह जब तक मुख्यमंत्री (CM) बनकर नहीं लौटेंगी, तब तक विधानसभा में कदम नहीं रखेंगी और इसके बाद 1991 में उन्होंने जबरदस्त जीत हासिल की और पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं।

इसी इतिहास की बात यहां परप्रसेन्नजीत घोष कर रहे थे। आपको बता दें कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के कथित बयान ने अनिश्चितता बढ़ाई है कि बहुमत साबित करने वाले गठबंधन को ही सरकार बनाने का न्योता मिलेगा।
क्यों मुश्किल है DMK-AIADMK गठबंधन?
- वैचारिक और राजनीतिक दुश्मनी: दोनों पार्टियां लंबे समय से सत्ता के लिए सीधी लड़ाई लड़ती रही हैं।
- कैडर स्तर पर विरोध: जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच भारी प्रतिस्पर्धा और विरोध है, जिसे अचानक खत्म करना आसान नहीं।
- नेतृत्व की महत्वाकांक्षा: M. K. Stalin और AIADMK नेतृत्व दोनों खुद को मुख्य शक्ति के रूप में पेश करना चाहते हैं।
- वोट बैंक का टकराव: दोनों दल लगभग समान सामाजिक और क्षेत्रीय वोट बैंक को टारगेट करते हैं।














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