India ICBM Missile: DRDO का सीक्रेट मिसाइल टेस्ट, चीन-पाकिस्तान को सता रहा डर, अमेरिका तक रेंज?- Video

India ICBM Missile: Defence Research and Development Organisation यानी DRDO ने शुक्रवार शाम ओडिशा तट से एक न्यूक्लियर कैपेबल इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का पहली सफल टेस्टिंग की। हालांकि DRDO ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन एक सूत्र से मिली जानकारी के आधार पर यह ICBM कैटेगरी की मिसाइल है।

भारत के इस कदम से क्यों डर रही दुनिया?

अगर भारत पूरी तरह ICBM क्षमता हासिल कर लेता है, तो इसका मतलब होगा कि अमेरिका समेत दुनिया का लगभग कोई भी हिस्सा भारतीय मिसाइल की रेंज से बाहर नहीं रहेगा। अभी तक केवल अमेरिका, रूस, चीन और उत्तर कोरिया के पास ही 12,000 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली तैनात ICBM तकनीक मौजूद है।

India ICBM Missile

आखिर ICBM इतनी महत्वपूर्ण क्यों होती है?

न्यूक्लिर-क्षम ICBM रखने का सबसे बड़ा मतलब यह है कि अगर किसी देश पर न्यूक्लिर हमला होता है, तो वह तुरंत जवाबी हमला करने की क्षमता रखता है। इसे न्यूक्लियर डिटरेंस यानी न्यूक्लिर प्रतिरोधक क्षमता कहा जाता है। साथ ही यह किसी देश की रॉकेट प्रपल्शन, गाइडेंस सिस्टम और री-एंट्री टेक्नोलॉजी में महारत को भी दिखाता है।

दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइलें कौन-कौन सी?

वैश्विक स्तर पर Russia के पास RS-28 Sarmat और R-29RMU2.1 Liner जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज 12,000 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है। China ने DF-41 मिसाइल तैनात की है, जिसकी अनुमानित रेंज 12,000 से 15,000 किलोमीटर है। वहीं United States के पास LGM-30G Minuteman III और आने वाली LGM-35 Sentinel जैसी मिसाइलें हैं। North Korea भी 10,000 से 15,000 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है।

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भारत ने 'डंब' हथियार को बनाया 'स्मार्ट'

एक और बड़ी उपलब्धि में भारत ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है जो डंब यानी अनिर्देशित वारहेड को स्मार्ट यानी गाइडेड हथियार में बदल सकती है। इससे भारत उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जिनके पास एडवांस स्टैंड-ऑफ वेपन क्षमता मौजूद है।

भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम

रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि DRDO और Indian Air Force (IAF) ने गुरुवार को ओडिशा तट से Tactical Advanced Range Augmentation Weapon का पहला फ्लाइट टेस्ट किया। यह भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना गाइडेंस वाले वारहेड्स को सटीक निशाना लगाने वाले स्मार्ट हथियारों में बदल सकती है।

फ्रांस और ब्रिटेन के पास अलग न्यूक्लियर पावर

जहां अमेरिका, रूस और चीन लंबी दूरी की ICBM क्षमता रखते हैं, वहीं France और United Kingdom के पास ऑपरेशनल न्यूक्लियर कैपेबल सबमरीन-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल यानी SLBM तकनीक है। यह लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब DRDO अध्यक्ष Sameer V Kamat ने हाल ही में कहा था कि अग्नि-6 से जुड़ी सभी तकनीकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और सरकार की परमीशन मिलते ही अगला कदम उठाया जाएगा।

BJP ने भी दिया था बड़ा संकेत

पिछले बुधवार को BJP ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अग्नि-6 को लेकर बड़ा संकेत दिया था। पार्टी ने लिखा था, "अग्नि-6: भारत एक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर! 10,000+ किमी मारक क्षमता और MIRV तकनीक के साथ अग्नि-6 इतिहास रचने को तैयार।"

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भारत की रक्षा ताकत तेजी से बदल रही है

पिछले कुछ सालों में भारत लगातार अपनी रक्षा तकनीक को आधुनिक बनाने में जुटा हुआ है। मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्मार्ट हथियारों के क्षेत्र में भारत तेजी से आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है। अगर ICBM क्षमता को लेकर ये रिपोर्ट सही साबित होती है, तो भारत वैश्विक सैन्य शक्ति संतुलन में और मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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