Farming Tips: पारंपरिक खेती से आधुनिक खेती की तरफ़ करें रुख, महीने में होगी लाखों में कमाई

Farming Tips:मधुमक्खी पालन से आप भी लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं। इसके लिए प्रशिक्षण और अनुभव होना बहुत ज़रूरी है।

Farming Tips: Earning in lakhs in a month by Moving from traditional farming to modern farming

Farming Tips: बिहार में किसान पारंपरिक खेती से आधुनिक खेती की तरफ रुख कर काफी मुनाफा कमा रहे हैं। खेती में नए-नए प्रयोग से किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है। पूर्णिया जिले में युवा किसान विदेशी सब्जी जुगनी का खेती कर लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। बेगूसराय में युवा किसान सेब और स्ट्रॉबेरी की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं आज हम आपको नालंदा के किसान सुरेंद्र राम के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने आधुनिक तरीके से खेती कर जिले में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

नालंदा जिला के दीपनगर निवासी किसान सुरेंद्र राम 10 एकड़ में ज़मीन में खेती, बागवानी, पशुपालन और वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन कर काफी मुनाफा कमा रहे हैं। सुरेंद्र राम इन सबके अलावा मधुमक्खी पालन में भी रूचि रखते है। मधुमक्खी पालन कर वह सालाना करीब 7 लाख रुपये तक कमा लेते हैं। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण और एक्सपीरियंस होना बहुत ज़रूरी है। जनवरी महीने में मधुमक्खी पालन की शुरुआत करनी चाहिए। क्योंकि इस महीने में पौधों और पेड़ों में फूल निकलते हैं। मधुमक्खी फूलों का रस चूसती कर शहद जमा करती है।

मधुमक्खी पालन की लागत की बात करें तो शुरुआत 7 हज़ार रुपये में एक कॉलोनी (जिसमें मधुमक्खी रहती है) लेनी होगी। मधुमक्खी के लिए कॉलोनी पहले से मधुमक्खी पालन कर रहे पालक के पास आसानी से मिल जाती है। मधुमक्खी पालक से से कॉलोनी और मधुमक्खी का फ्रेम खरीद कर मधुमक्खी पालन कर सकते हैं। एक कॉलोनी से 50 किलो तक शहग निकलता है। किसान सुरेंद्र राम के पास करीब 35 कॉलोनियां हैं। जनवरी महीने से जून महीने तक मधुमक्खियां छतों में शहद जमा करती है।

शहाद निरालने वाली मशीन के सहारे शहद को बाहर निकाला जाता है, इसके बाद प्रोसेसिंग कर शुद्ध करने के बाद शहद को बाज़ारों में बेचा जाता है। 500 रुपये किलो तक शहद की कीमत होती है। सुरेंद्र राम मधुमक्खी पालन का कारोबार पिछले 7 सालों से कर रहे हैं। अब उन्हें विभिन्न जगहों किसानों को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग देने लिए बुलाया जाता है। कम लागत में मधुमक्खी का पालन कैसे करें, ज्यादा आमदनी कैसे हो? इस तरह की जानकारी किसानों को देते हैं।

किसान सुरेंद्र राम की मानें तो रात के वक्त में मधुमक्खियों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करना ज्यादा सही रहता है। मधुमक्खियां शाम के वक्त फूलों से रस चूस कर अपने-अपने कॉलोनी में आ जाती है। इसके बाद कॉलोनी को पैक कर रात के वक्त ही उसे दुसरी जगह भेजना सही रहता है। क्योंकि सूरज निकलते ही मधुमक्खियां अपने कॉलोनी से बाहर निकल जाती हैं। मधुमक्खियां कॉलनी के अंदर बने फ्रेम को 15 दिनों में भर देती है। इसे काट कर निकालने के बाद उससे शहद निकाला जाता है।गौरतलब है कि मधुमक्खियों की ये खासियत होती है कि वह जिस कॉलोनी में रहती हैं, शाम में वापस उसी कॉलोनी में आती हैं। रानी मधुमक्खी से एक खास किस्म की महक निकलती है, नर और मादा मधुमक्खी इससे आकर्षित होती है। एक कॉलोनी में एक ही रानी मधुमक्खी होती है। उस रानी मधुमक्खी का काम प्रजनन करना ही होता है। एक कॉलोनी में 10 फ्रेम होते हैं। इनमें नर,मादा और रानी मधुमक्खियां रहती हैं।

सुरेंद्र राम ने बताया कि देसी जुगाड़ से शहद प्रोसेसिंग किया जा सकता है। बड़े बर्तन में आधा पानी भरकर उसके अंदर लकड़ी का गुटका डालते हैं। उसके ऊपर छोटे बर्तन में शहद डालते हैं। इसके बाद पानी को उबाला जाता है। ऐसा करने से बर्तन में शहद उबलने लगता है और उससे गंदगी बाहर निकल जाती है। इसे निकाल कर अलग कर दिया जाता है। इस तरह शहद को शुद्ध कर सकते हैं। शहद के प्रोसेसिंग के लिए बाजार में मशीन भी उपलब्ध है। 4 लाख रुपये तक में मशीन खरीद सकते हैं। खेतों में बागवानों में मधुमक्खी के कॉलोनी को रखकर अच्छी आमदनी की जा सकती है। सुरेंद्र राम ने बताया कि शहद के अलावा, बचे हुए मोम से भी अच्छी कमाई कर सकते हैं।

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