अगर धरती पर ना रहे ये जीव, तो मानव जीवन का ही हो जाएगा अंत, पर्यावरण दिवस पर जान लें ये बड़ी बात
अगर धरती पर ना रहे ये जीव, तो मानव जीवन का ही हो जाएगा अंत, पर्यावरण दिवस पर जान लें ये बड़ी बात
नई दिल्ली, 05 जून: दुनियाभर में 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के नेतृत्व में, विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को पर्यावरण की खराब स्थिति के बारे में जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर लोगों को सकारात्मक पर्यावरणीय कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। जब बात पर्यावरण को बेहतर बनाने की हो तो, इससे पशु-पक्षियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। दुनिया में कई ऐसे, जीव हैं, जिनके अस्तित्व पर ही मानव जीवन का अस्तित्व टिका है। ऐसे ही जीव है परागणकों यानी कीट-पतंग, जिसमें मधुमक्खियां, तितलियां और चमगादड़ आते हैं। कई रिसर्च में दावा किया गया है कि मधुमक्खी को पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। आइए जानें कैसे ?

मधुमक्खियों से मानव जीवन का क्या है कनेक्शन
असल में विभिन्न प्रकार के प्रदूषण पैदा करने वाली मानवीय गतिविधियों ने परागणकों जैसे मधुमक्खियों, तितलियों और चमगादड़ों को गंभीर खतरे में डाल दिया है। आलम ये है कि धीरे-धीरे इनकी संख्या घट रही है। ये कीट-पतंगें हम मनुष्यों के अस्तित्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे परागण की प्रक्रिया के चालक हैं जो हमारे पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के लिए सबसे बेसिक चीज है।

मधुमक्खियां पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे जरूरी, आखिर कैसे
मधुमक्खियों को लेकर लंदन की रॉयल जियोग्राफिकल सोसायटी का दावा है कि ये कई वजहों से पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे अधिक जरूरी है। असल में हम जो फल और सब्जी या अनाज खाते हैं, उन्हें उपजाने के लिए परागण की प्रक्रिया बहुत जरूरी होती है। मधुमक्खियां इन्ही पेड़-पौधों के पराग कणों को बैलेंस करने का काम करती है। मधुमक्खियां पराग कणों को एक पौधों से दूसरे पौधे तक पहुंचाती है। जब भी मधुमक्खियां किसी फूल-सब्जी या पौधों पर बैठती है तो उसके पैरों और पंखों में परागकण चिपक जाते हैं, फिर ये उड़कर कहीं और जाकर बैठती है तो यह पराग कण उस पौधे में चला जाता है। जिसकी वजह से वह निषेचित होते हैं और फल और बीजों का उगना शुरू होता है।

मधुमक्खियां कैसे हमारे इकोसिस्टम में मदद करती है?
दुनिया के अधिकांश जंगली फूल वाले पौधों की प्रजातियां, आंशिक रूप से या पूरी तरह से, पशु पराग कणों पर निर्भर करती हैं। इतना ही नहीं, 75 प्रतिशत से अधिक खाद्य फसलें और 35 प्रतिशत वैश्विक कृषि भूमि भी परागण पर निर्भर करती है।
ये पोलिनेटर, जिसमें मधुमक्खियां जैसे कीट-पतंग आते हैं, न केवल वैश्विक खाद्य सुरक्षा में योगदान करते हैं बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मधुमक्खियां कई पौधों के अस्तित्व और प्रजनन को भी सुनिश्चित करती हैं। वे वन पुनर्जनन का समर्थन करते हैं, और जलवायु परिवर्तन के लिए स्थिरता और अनुकूलन को बढ़ावा देते हैं। वे कृषि उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार करने में भी मदद करते हैं।

'मधुमक्खियां उस जैव विविधता का हिस्सा, जिस पर हम सभी अपने अस्तित्व के लिए निर्भर हैं...'
''मधुमक्खियां मानव और प्लानेंट के लिए क्यों जरूरी है...'' इस विषय पर यूएन ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, 'मधुमक्खियां उस जैव विविधता का हिस्सा हैं जिस पर हम सभी अपने अस्तित्व के लिए निर्भर हैं। वे उच्च गुणवत्ता वाले भोजन-शहद, शाही जेली और पराग-और अन्य उत्पाद जैसे मोम, प्रोपोलिस हमें प्रदान करते हैं।' संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मधुमक्खियों के संरक्षण से वैश्विक खाद्य आपूर्ति समस्याओं को हल करने में मदद मिलेगी। बता दें कि मधुमक्खी एक ऐसी कीट है, जो किसी भी तरह का रोगजनक बैक्टीरिया या वायरस नहीं छोड़ती है।

मधुमक्खियां और किस तरह से हमें फायदा पहुंचाती है?
जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं (आईपीबीईएस) पर इंटरगवर्नमेंटल साइंस-पॉलिसी प्लेटफॉर्म की 2019 की ऐतिहासिक रिपोर्ट के अनुसार, "दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों में मधुमक्खियों के बारे में पवित्र मार्ग सहस्राब्दियों से मानव समाज के लिए उनके महत्व को उजागर करते हैं।"
मधुमक्खी पालन कई ग्रामीण आजीविका के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है। आईपीबीईएस के अनुसार, पश्चिमी मधुमक्खी वैश्विक स्तर पर सबसे व्यापक रूप से प्रबंधित परागणक है, और 80 मिलियन से अधिक छत्ते सालाना अनुमानित 1.6 मिलियन टन शहद का उत्पादन करते हैं। बता दें कि परागणकर्ता सीधे खाद्य सुरक्षा में योगदान करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के मधुमक्खी विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया का एक तिहाई खाद्य उत्पादन मधुमक्खियों पर निर्भर करता है।












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