ग्लेशियर टूटने की खबर सुन उत्तराखंड के लोगों के रोंगटे हुए खड़े, आंखों के सामने आया 2013 की तबाही का मंजर
Chamoli Glacier Burst: 2013 के भीषण जल प्रलय से उत्तराखंड अभी उभरा भी नहीं था कि रविवार को चमोली जिले में एक बड़ी मुसीबत सामने आ गई, जहां ग्लेशियर टूटने से भारी नुकसान हुआ। इसके अलावा धौलीगंगा नदी में बाढ़ की वजह से कई जिलों को अलर्ट पर रखा गया है। फिलहाल ITBP, NDRF और SDRF की टीमें बचाव कार्य में जुट गई हैं। वहीं दूसरी ओर जैसे ही ग्लेशियर टूटने की खबर सामने आई वैसे ही उत्तराखंड के लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। साथ ही उनकी आंखों के सामने 2013 की तबाही का मंजर फिर से आ गया।
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इसी तरह हुई थी तबाही
जून 2013 में बाबा केदरानाथ की यात्रा अपने परवान पर थी। 16 जून को बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए केदारनगरी पहुंचे, तभी वहां पर अचानक मौसम बदला और बादल फटने की खबर आई। जब तक वहां पर मौजूद पुलिसकर्मी और श्रद्धालु कुछ समझ पाते तब तक ऊपर से जल सैलाब केदारनगरी के पास पहुंच गया। अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 4400 से ज्यादा लोग इस घटना में मारे गए या फिर लापता हो गए। अभी भी विकास कार्यों के वक्त लोगों के कंकाल वहां पर मिलते रहते हैं।

सड़क, मकान, पुल सब तबाह
16-17 जून को केदारनाथ के साथ ही जल प्रलय ने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिले में भी भारी तबाही मचाई। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस आपदा में 4200 से ज्यादा गांवों से संपर्क टूट गया था। इसके अलावा 11 हजार से ज्यादा मवेशी बाढ़ के पानी में बह गए। साथ ही 1309 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ ने पूरी तरह तबाह कर दी, जबकि 2141 भवन ध्वस्त हुए। 2013 की आपदा ने उत्तराखंड के 9 नेशनल हाईवे, 35 स्टेट हाईवे, 2385 सड़कें, 86 मोटर पुल, 172 अन्य छोटे-बड़े पुलों को नुकसान पहुंचाया था। वहीं केदरानाथ धाम में मंदिर को छोड़कर सब कुछ तबाह हो गया, आपदा के 7 साल बाद भी वहां पर जीर्णोद्धार का काम जारी है।

देवभूमि के लिए हो रहीं दुआएं
7 फरवरी 2021 का दिन भी सामान्य था। उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में हल्की-फुल्की बर्फबारी इन दिनों हो रखी है। जिस वजह से बड़ी संख्या में सैलानी वहां पर पहुंच रहे हैं, लेकिन रविवार को जैसे ही मीडिया में चमोली में ग्लेशियर टूटने की खबर सामने आई, वैसे ही उत्तराखंड के लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। उनकी आंखों के सामने 2013 की तबाही का मंजर फिर से आ गया। चमोली के एक स्थानीय निवासी ने वन इंडिया से बात करते हुए बताया कि उनका इलाका आज की आपदा में पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन बार-बार उन्हें 2013 की आपदा याद आ रही है। साथ ही हर जगह बस यही दुआएं की जा रहीं कि हे भगवान! इस बार उत्तराखंड को 2013 जैसा दंश ना झेलना पड़े।

युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
मोदी सरकार केदरानाथ के जीर्णोद्धार पर पूरा फोकस कर रही। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 के चुनाव से पहले केदरानाथ और बद्रीनाथ धाम की यात्रा कर चुके हैं। ऐसे में चमोली की घटना के तुरंत बाद गृहमंत्री अमित शाह ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से बात की। साथ ही उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। मौके पर NDRF, SDRF के अलावा आईटीबीपी के 200 से ज्यादा जवानों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया है। इसके अलावा सेना और वायुसेना की भी मदद ली जा रही है।












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