Strawberry Moon: आज भारत में दिखेगा स्ट्रॉबेरी मून, जानें कब और कैसे देख पाएंगे यह दुर्लभ नजारा
Strawberry Moon: चांद के साथ किस्से-कहानियां और कविताओं के साथ ही खगोल और ज्योतिष विज्ञान भी जुड़ा है। बुधवार (11 जून, 2025) का दिन चंद्रमा की गति और दिशा के लिहाज से खास है। बुधवार की शाम आसमान में स्ट्रॉबेरी चांद के रूप में दुर्लभ नजारा देखने को मिल सकता है। खगोल विज्ञान के मुताबिक, आज दिखने वाला चांद माइक्रो मून होगा। इसकी खासियत है कि इस घटना की वजह से सामान्य से थोड़ी दूरी पर चंद्रमा नजर आएगा। यही वजह है कि चांद अपने नियमित आकार की तुलना में छोटा दिखेगा। जानें इससे जुड़े हर सवाल का जवाब यहां।
Strawberry Moon क्या होता है?
स्ट्रॉबेरी मून एक दुर्लभ खगोलीय घटना है। अमूमन हर 18.6 साल में एक बार आने वाला 'मेजर लूनर स्टैंडस्टिल' होता है। इस वजह से चांद आसमान के सबसे निचले हिस्से में नजर आता है। इससे पहले 2006 में यह नजारा देखने को मिला था।

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Strawberry Moon क्यों नाम दिया गया है?
जून महीने की पूर्णिमा के दिन एक निश्चित अवधि के बाद चांद अपने इस रूप में नजर आता है। इसे 'Strawberry Moon' नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि उत्तरी अमेरिका में इस समय जंगली स्ट्रॉबेरी पकने लगती थी। इसके अलावा, इसे ग्रीन कॉर्न मून, मिड मून जैसे नामों से भी जाना जाता है।
किस रंग का दिखेगा स्ट्रॉबेरी मून और क्या होती है इसकी खासियत?
स्ट्रॉबेरी मून नाम जरूर दिया गया है, लेकिन चांद का रंग लाल या गुलाबी की तरफ जाता हुआ नहीं होता है। इस दिन चांद सुनहरे से हल्का लाल-नारंगी जैसा दिख सकता है। खगोल विज्ञान में यह छोटा सा आकाशीय भ्रम है।
क्या है इस बार की खासियत?
18.6 साल में एक बार आने वाला 'मेजर लूनर स्टैंडस्टिल' की वजह से चंद्रमा आसमान में बेहद निचले हिस्से में नजर आता है। इसके बाद यह नजारा अगली बार 2043 में ही दिख सकता है।
भारत में इसे कब और कैसे देख सकते हैं?
भारत में स्ट्रॉबेरी मून दिखने का समय 10-11 जून 2025 है। शाम 7 बजे से यह नजारा देख सकते हैं। खगोलीय लिहाज से यह घटना दुर्लभ है। हालांकि, अच्छा रहेगा कि चांद को खुली आंखों के बजाय दूरबीन या चश्मा लगाकर देखा जाए।
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ज्योतिष के लिहाज से क्या है महत्व
ज्योतिष शास्त्र में भी पूर्णिमा के चांद का अपना महत्व है। ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि के दिन चंद्र योग के लिए चांद की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की पूजा और ध्यान करने से आत्मशुद्धि और आत्मबल मिलता है।












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